बिहार में भवन निर्माण में गुणवत्ता पर सख्ती: इंजीनियर और ठेकेदार होंगे जिम्मेदार
पटना: बिहार में भवन निर्माण की गुणवत्ता को लेकर अब सरकार सख्त हो गई है। निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कोताही पाए जाने पर संबंधित विभाग के कार्यपालक अभियंता और ठेकेदार की जवाबदेही तय की जाएगी। यह महत्वपूर्ण निर्णय भवन निर्माण विभाग और निगम की जारी योजनाओं की समीक्षा बैठक में लिया गया, जिसमें निर्माण की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया गया।
बैठक में भवन निर्माण विभाग के अपर सचिव, संयुक्त सचिव, मुख्य अभियंता, निदेशक अनुश्रवण, अधीक्षण अभियंता, कार्यपालक अभियंता तथा विभिन्न प्रशासी विभागों के नोडल पदाधिकारियों सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक का मुख्य उद्देश्य योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाना, पिछड़ रही परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना और निर्माण के दौरान आने वाली समस्याओं का त्वरित समाधान खोजना था।
बैठक में सात जिलों – अररिया, नवादा, कैमूर सहित अन्य – में 620 क्षमता वाले अटल कला भवनों के निर्माण का निर्णय लिया गया। इसके अतिरिक्त, राजगीर खेल परिसर के अधूरे कार्यों को शीघ्रता से पूरा करने के निर्देश दिए गए। बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के शेष भवनों के निर्माण कार्य को भी समय पर पूर्ण करने का आदेश जारी किया गया है।
वर्तमान में भवन निर्माण विभाग द्वारा 2599 पंचायत सरकार भवनों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इनमें से 327 भवनों का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है, जबकि 196 भवनों में फिनिशिंग का काम चल रहा है। अभियंताओं ने दिसंबर माह तक अतिरिक्त 233 पंचायत सरकार भवनों का निर्माण कार्य पूर्ण करने का आश्वासन दिया है।
एक अन्य महत्वपूर्ण निर्देश में, जिला एवं अनुमंडल न्यायालयों में ट्रांसजेंडर और दिव्यांगजनों के लिए अलग से शौचालय की सुविधा विकसित करने का आदेश दिया गया है। भवन निर्माण विभाग ने अभियंताओं को गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित करने के लिए संवेदकों के साथ महीने में कम से कम दो बार बैठक करने का निर्देश दिया है, ताकि निर्माण प्रक्रिया की नियमित समीक्षा हो सके और किसी भी स्तर पर गुणवत्ता से समझौता न हो। इस पहल से भविष्य में बनने वाले भवनों की मजबूती और गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है।
