गाजियाबाद सोसायटियों में नियमों के विरुद्ध एसटीपी, AOA ने उठाई सवाल
गाजियाबाद की कई आवासीय सोसायटियों में नियमों को ताक पर रखकर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किए गए हैं। अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (एओए) ने आरोप लगाया है कि ये एसटीपी निर्धारित पर्यावरणीय मंजूरी (ईसी) के अनुरूप नहीं हैं और उत्पन्न हो रहे सीवेज वाटर को पूरी तरह से ट्रीट करने में असमर्थ हैं। शहर की राजनगर एक्सटेंशन, क्रॉसिंग रिपब्लिक और एनएच-9 क्षेत्र की कई सोसायटियों में क्षमता से कम क्षमता के एसटीपी लगाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
नियमानुसार, बिल्डरों को सोसायटी के कुल क्षेत्रफल और फ्लैटों की संख्या के आधार पर पर्याप्त क्षमता का एसटीपी लगाना अनिवार्य है। इसके बावजूद, कई परियोजनाओं में कम क्षमता के एसटीपी स्थापित किए गए हैं। एओए का आरोप है कि संबंधित विभागों की मिलीभगत से बिल्डरों ने नियमों को दरकिनार किया है।
गौर कैस्केड्स एओए के सचिव पुनीत गोयल ने बताया कि उनकी सोसायटी में 500 केएलडी क्षमता का एसटीपी लगना था, लेकिन मौके पर केवल 70 केएलडी क्षमता का छोटा प्लांट लगाया गया है, जो सीवेज ट्रीटमेंट के लिए अपर्याप्त है। इस संबंध में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में शिकायत दर्ज कराई गई है।
इसी तरह, आदित्य वर्ल्ड सिटी सेक्टर-एक, दो, तीन और चार के एओए अध्यक्ष डा. शिव कुमार ने आरोप लगाया कि टाउनशिप की अनुमानित जनसंख्या के अनुपात में एसटीपी की क्षमता बहुत कम है। स्वीकृत लेआउट के अनुसार जहां 1,57,095 जनसंख्या का अनुमान था, वहीं एसटीपी का निर्माण उसी के अनुरूप नहीं हुआ। सेक्टर-तीन में प्रस्तावित 3,591.5 वर्ग मीटर भूमि के बजाय केवल 237 वर्ग मीटर क्षेत्र में ही एसटीपी विकसित किया गया है। बिल्डर पक्ष का कहना है कि ईआइए रिपोर्ट में 57,495 जनसंख्या का अनुमान है और उसी के अनुसार एसटीपी का संचालन हो रहा है।
इस लापरवाही का सीधा असर शहर के पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है, क्योंकि अपर्याप्त सीवेज उपचार से जल प्रदूषण का खतरा बढ़ जाता है।
