Social Media Addiction: मानसिक स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा, विशेषज्ञ बोले- डिजिटल संतुलन जरूरी
आजकल सोशल मीडिया का दखल लोगों की जिंदगी में इस कदर बढ़ गया है कि यह एक लत का रूप ले चुका है। सुबह आंख खुलने से लेकर रात को सोने तक लोग अपने मोबाइल फोन से चिपके रहते हैं। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस डिजिटल लत को सेहत के लिए गंभीर खतरा बताया है। अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक और मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. देवाशीष शुक्ला ने कहा कि यह समस्या अब बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों सभी को अपनी चपेट में ले चुकी है।
मानसिक तनाव और एकाग्रता की कमी
विशेषज्ञों के अनुसार, सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग मानसिक तनाव, अनिद्रा, अवसाद और चिड़चिड़ेपन का कारण बन रहा है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में जलन, सिर दर्द, गर्दन और कमर दर्द जैसी शारीरिक समस्याएं भी बढ़ रही हैं। युवा वर्ग में एकाग्रता की कमी और पढ़ाई से ध्यान भटकने की शिकायतें आम हो गई हैं। डॉ. देवाशीष शुक्ला ने कहा कि बच्चों और किशोरों पर इसका असर सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। वे ऑनलाइन गेम और रील्स देखने में घंटों बिताते हैं, जिससे उनका शारीरिक विकास प्रभावित हो रहा है और सामाजिक व्यवहार में बदलाव आ रहा है।
समाधान: स्क्रीन टाइम सीमित करें
विशेषज्ञों ने इस समस्या से निपटने के लिए कई सुझाव दिए हैं। डॉ. अर्चना चौहान ने कहा कि सोशल मीडिया का सीमित और संतुलित उपयोग बेहद जरूरी है। उन्होंने सलाह दी कि दिनचर्या में योग, व्यायाम और खेलकूद को शामिल किया जाना चाहिए। बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम तय करना और अभिभावकों द्वारा उनकी निगरानी रखना महत्वपूर्ण है। डॉ. सार्थक दवे ने कहा कि सोशल मीडिया पूरी तरह से गलत नहीं है, लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल नुकसानदेह है। सही समय प्रबंधन और जागरूकता के जरिए ही इस बढ़ती समस्या से बचा जा सकता है।
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