SIR प्रक्रिया में नौकरीपेशा ग्रामीणों की लापरवाही से विकास कार्य बाधित
ग्रेटर नोएडा में स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन (SIR) की महत्वाकांक्षी परियोजना सरकारी प्रक्रियाओं में स्थानीय नागरिकों के सहयोग के अभाव से प्रभावित हो रही है। विशेष रूप से, नौकरीपेशा ग्रामीण इस प्रक्रिया में एक बड़ी बाधा के रूप में सामने आ रहे हैं। निर्वाचन नामावली के विशेष सघन पुनरीक्षण के तहत, मतदाताओं को फॉर्म वितरित किए जा रहे हैं, लेकिन कई ग्रामीण, जो रोजगार या व्यवसाय के सिलसिले में शहरों में निवास करते हैं, भरे हुए फॉर्म को वापस बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) को जमा नहीं कर रहे हैं।
यह स्थिति SIR के विकास कार्यों को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने में गंभीर अड़चन पैदा कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश मतदाता परिवारों के साथ शहरों में बस गए हैं, लेकिन उनका वोट आज भी उनके पैतृक गांव में ही दर्ज है। जब बीएलओ इन मतदाताओं के घरों पर फॉर्म लेकर पहुंचते हैं, तो परिवार के सदस्य फार्म तो ले लेते हैं, लेकिन उन्हें भरकर वापस बीएलओ तक पहुंचाने में उदासीनता बरतते हैं। इसके परिणामस्वरूप, SIR के लिए आवश्यक डेटा संग्रह की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है।
जेवर विधानसभा क्षेत्र में लगभग तीन लाख 67 हजार मतदाता हैं। निर्वाचन नामावली के इस विशेष सघन पुनरीक्षण के लिए प्रत्येक मतदाता को फॉर्म पहुंचाना और उसे भरवाकर वापस लेना एक बड़ी चुनौती है। इस कार्य की जिम्मेदारी 398 बीएलओ पर सौंपी गई है। बीएलओ से काम तेजी से कराने के लिए सुपरवाइजरों की भी ड्यूटी लगाई गई थी। अधिकांश बीएलओ ने फार्म वितरित कर दिए हैं, लेकिन भरे हुए फार्म वापस नहीं मिल पा रहे हैं।
रविवार को, छुट्टी के बावजूद, बीएलओ, सुपरवाइजर और तहसील के अधिकारियों ने बूथों का दौरा कर मतदाताओं से संपर्क करने का प्रयास किया। फोन पर संपर्क साधकर कुछ मतदाताओं को गांव बुलाया गया, जिससे बीएलओ को कुछ राहत मिली। हालांकि, रविवार को कुल मतदाताओं के मात्र 15 प्रतिशत फॉर्म ही वापस मिल पाए। अधिकारियों ने इस समस्या पर चिंता व्यक्त की है और ग्रामीणों से सहयोग की अपील की है ताकि SIR का विकास बिना किसी रुकावट के पूरा हो सके।
