पुतिन के साये की तरह रहता है ‘सिलोविकी सर्किल’, इनके बिना रूस में पत्ता भी नहीं हिलता
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत के दौरे पर हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पुतिन पहली बार भारत आए हैं। वहीं, दुनिया में कुछ चुनिंदा देशों का ही दौरा करते हैं, जिनमें से भारत भी एक है। वैसे तो पुतिन की गिनती दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेताओं में होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पुतिन के हर फैसले के पीछे कौन होता है? इसका जवाब है ‘सिलोविकी सर्किल’।
पुतिन की सुरक्षा सुनिश्चित करने से लेकर रूस के हर बड़े फैसले का दारोमदार ‘सिलोविकी सर्किल’ पर है। पुतिन हमेशा ‘सिलोविकी सर्किल’ से घिरे रहते हैं और उनके रहते हुए कोई परिंदा भी पुतिन के आसपास नहीं भटक सकता है।
‘सिलोविकी सर्किल’ पुतिन के सबसे करीबी 7 लोगों का गुट है। इस लिस्ट में खुफिया एजेंट से लेकर पुतिन के कई विश्वासपात्र शामिल हैं। पुतिन के कठोर कदम और खतरनाक फैसलों के पीछे भी ‘सिलोविकी सर्किल’ का ही हाथ होता है। यह सर्किल हमेशा पुतिन पुतिन के साथ रहता है और पुतिन हर फैसले से पहले ‘सिलोविकी सर्किल’ की राय लेना कभी नहीं भूलते हैं।
सिलोविकी सर्किल 7 लोगों का समूह है, जिनमें रूसी खुफिया एजेंसी KGB के एजेंट भी शामिल हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन खुद KGB के एजेंट रह चुके हैं। ऐसे में सिलोविकी सर्किल के ज्यादातर लोग 1990 में पुतिन के साथ काम कर चुके हैं। रूस का राष्ट्रपति बनने के बाद पुतिन ने सबसे विश्वासपात्र लोगों को रूस का प्रमुख पद दिया और यह लोग हमेशा साए की तरह पुतिन के साथ रहने लगे। इसे ‘सिलोविकी सर्किल’ का नाम दे दिया गया, जिनकी इजाजत के बिना रूस में एक पत्ता तक नहीं हिलता है।
