शेख हसीना के बयान पर रोक, बांग्लादेश में मीडिया को चेतावनी जारी
बांग्लादेश की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी (एनसीएसए) ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद देश के सभी प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और इंटरनेट मीडिया को उनके बयानों को प्रसारित न करने का निर्देश दिया है। एजेंसी ने राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चिंता का हवाला देते हुए यह कदम उठाया है।
इस निर्णय को अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस द्वारा अवामी लीग और उसकी नेता शेख हसीना की गतिविधियों को दबाने के एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। एनसीएसए का कहना है कि वह इस बात से चिंतित है कि कुछ मीडिया संस्थान दोषी ठहराए गए व्यक्ति की टिप्पणियों को प्रसारित कर रहे हैं, जिनमें हिंसा और अव्यवस्था भड़काने वाले निर्देश शामिल हो सकते हैं। एजेंसी ने मीडिया से आग्रह किया है कि वे दोषी व्यक्तियों के बयानों को प्रकाशित करने से बचें और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति सचेत रहें।
हालांकि, एजेंसी ने प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करने की बात भी कही। उसने चेतावनी दी कि दोषी व्यक्तियों के बयानों को प्रसारित करना साइबर सुरक्षा अध्यादेश का उल्लंघन है और अधिकारियों को ऐसी सामग्री को हटाने का अधिकार है जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करती है या हिंसा भड़काती है। इस उल्लंघन पर दो साल तक की कैद या 10 लाख टका तक का जुर्माना हो सकता है।
दुनिया भर के 102 पत्रकारों ने हसीना के विरुद्ध फैसले पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) की प्रक्रिया को पक्षपाती और अपारदर्शी बताते हुए कानून के शासन के लिए खतरा बताया है। उन्होंने इस फैसले को तत्काल रद्द करने और न्यायिक कार्यवाही को पारदर्शी व निष्पक्ष तरीके से फिर से शुरू करने की मांग की है। बांग्लादेश के सरकारी विश्वविद्यालयों के लगभग 1001 शिक्षकों ने भी इस फैसले को मनगढ़ंत और झूठा करार दिया है।
संयुक्त राष्ट्र ने भी हसीना के विरुद्ध फैसले पर खेद व्यक्त किया है, विशेषकर मृत्युदंड दिए जाने पर। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि गुटेरस मृत्युदंड के विरोध में हैं। इस बीच, अवामी लीग ने देशव्यापी बंद का आह्वान किया है, जिससे बांग्लादेश में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।
