वरिष्ठ पत्रकार मार्क टली का निधन, भारत के लिए क्यों खास थी उनकी Mark Tully news?
वरिष्ठ पत्रकार और बीबीसी के पूर्व भारत ब्यूरो प्रमुख सर मार्क टली का 90 वर्ष की आयु में दिल्ली में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। टली साहब को भारत की पत्रकारिता जगत में एक विशेष स्थान प्राप्त था। उन्हें ‘बीबीसी की भारतीय आवाज’ के रूप में जाना जाता था, क्योंकि उन्होंने दशकों तक भारत की नब्ज को दुनिया तक पहुंचाया। उनका निधन पत्रकारिता के एक युग का अंत माना जा रहा है।
मार्क टली का जन्म 1935 में कलकत्ता (अब कोलकाता) में हुआ था। उन्होंने ब्रिटेन के कैम्ब्रिज से पढ़ाई की थी, लेकिन उनका दिल हमेशा भारत में रहा। दिल्ली के निजामुद्दीन वेस्ट में रहने वाले टली विदेशी पत्रकारों में गिने-चुने लोगों में से थे जो धाराप्रवाह हिंदी बोलते थे। इसी कारण उन्हें प्यार से ‘टली साहब’ बुलाया जाता था।
अपने लंबे करियर के दौरान, टली ने दक्षिण एशिया की कई ऐतिहासिक घटनाओं को कवर किया। इनमें 1984 का ऑपरेशन ब्लू स्टार, भोपाल गैस त्रासदी, भारत-पाक युद्ध और राजीव गांधी की हत्या जैसी बड़ी घटनाएं शामिल हैं। 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के दौरान भी वे मौजूद थे, जहां उन्हें भीड़ के हमले से बचाने के लिए स्थानीय अधिकारियों ने एक कमरे में बंद कर दिया था।
आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी ने उन्हें 24 घंटे के नोटिस पर भारत छोड़ने का आदेश दिया था, लेकिन आपातकाल हटते ही वे वापस लौट आए। भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री और पद्म भूषण से सम्मानित किया। ब्रिटेन ने उन्हें 2002 में ‘सर’ की उपाधि दी। हालांकि वे ब्रिटिश नागरिक थे, उन्होंने बाद में ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) का दर्जा हासिल किया, यह कहते हुए कि वे खुद को उन दो देशों के नागरिक मानते हैं जिनसे वे सबसे करीब महसूस करते हैं।
उनके सहयोगी मधुकर उपाध्याय ने टली के निधन को पत्रकारिता जगत की अपूर्णीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि टली पत्रकारिता के ऐसे शिक्षक थे, जिनसे देखकर ही सीखा जा सकता था। उन्होंने कभी अपने साथियों को यह नहीं बताया कि क्या करना है, बल्कि अपने उच्च मापदंडों से उदाहरण पेश किया।
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