SC में मतदाता सूची की वैधता पर बहस, चुनाव आयोग के अधिकारों पर कोर्ट का अहम फैसला
सुप्रीम कोर्ट में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की वैधता को लेकर बुधवार को सुनवाई शुरू हुई। इस दौरान कोर्ट ने चुनाव आयोग के कामकाज और उसके अधिकारों पर महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने चुनाव आयोग द्वारा मतदाताओं पर नागरिकता साबित करने की जिम्मेदारी डालने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
इस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग केवल एक डाकघर नहीं है, जो बिना पड़ताल किए आवेदन स्वीकार कर ले। अदालत ने कहा कि आयोग के पास दस्तावेजों की सत्यता को जांचने का वैधानिक अधिकार है, ताकि चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता बनी रहे। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी प्रक्रिया का असामान्य होना उसकी वैधता तय करने का मापदंड नहीं हो सकता।
मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ कर रही है। बुधवार को केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के मामले सामने आए, जहां एसआईआर की वैधता को कई याचिकाओं के जरिये चुनौती दी गई है। केरल में स्थानीय निकाय चुनावों के मद्देनजर फिलहाल एसआईआर टालने की मांग की गई, जिस पर कोर्ट ने चुनाव आयोग को जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए दो दिसंबर की तारीख तय की। इसी तरह तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के मामलों में भी आयोग को जवाब देने को कहा गया और नौ दिसंबर की तारीख निर्धारित की गई।
चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि कुछ राजनीतिक दल डर पैदा कर रहे हैं। आयोग ने यह भी बताया कि बिहार में एसआईआर संपन्न हो चुका है, हालांकि उसकी वैधता का मुद्दा अभी लंबित है। सुनवाई के दौरान एक अहम सवाल उठाया गया कि क्या आधार कार्ड होने मात्र से किसी व्यक्ति को मतदाता बनाया जाना चाहिए, खासकर तब जब वह पड़ोसी देश से आकर मजदूरी कर रहा हो और उसे सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा हो। इस पर कोर्ट की टिप्पणियां आयोग के अधिकारों और उसकी जिम्मेदारियों को रेखांकित करती हैं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि केवल पात्र नागरिक ही मतदाता सूची में शामिल हों और चुनाव प्रक्रिया की शुचिता बनी रहे। मामले में बहस गुरुवार को भी जारी रहेगी।
