सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा से पूछा: वकील की गिरफ्तारी मामले की CBI जांच क्यों नहीं?
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को हरियाणा सरकार से तीखा सवाल पूछा है कि एक वकील की गिरफ्तारी से जुड़े हत्या के मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को क्यों न सौंपी जाए। यह मामला तब सामने आया जब गुरुग्राम पुलिस के विशेष कार्यबल (STF) ने दिल्ली के एक वकील, विक्रम सिंह, को एक हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था। चीफ जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में वकील विक्रम सिंह की तत्काल रिहाई का आदेश दिया था और हरियाणा पुलिस से बृहस्पतिवार तक इस संबंध में विस्तृत जवाब मांगा है।
विक्रम सिंह की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कोर्ट में चौंकाने वाले आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल को हिरासत में बेरहमी से यातना दी गई और उसे उसके मुवक्किलों से संबंधित जानकारी उगलवाने के लिए गिरफ्तार किया गया था। अधिवक्ता ने बताया, “उसे पूरी रात एक खंभे से बांधकर रखा गया। उसे धमकी दी गई कि उसके बाल काट दिए जाएंगे और पुलिस थाने में ही उसके बाल तुरंत काट दिए गए।” यह आरोप हिरासत में दुर्व्यवहार और वकील के अधिकारों के उल्लंघन की ओर इशारा करते हैं।
विकास सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि एसटीएफ अधिकारी वकील विक्रम पर गैंगवार से जुड़े विवादों में समझौता कराने का दबाव डाल रहे थे, क्योंकि वह कुछ आरोपियों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। उन्होंने सवाल उठाया, “एक वकील कुख्यात गैंगस्टरों के बीच के मामलों में कैसे समझौता करा सकता है?” इन गंभीर आरोपों को देखते हुए, वकील के पक्ष ने जांच सीबीआई को सौंपने का पुरजोर आग्रह किया, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।
हालांकि, हरियाणा सरकार के वकील ने इन सभी आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि विक्रम सिंह की जमानत बांड अगले दिन ही भर दी गई थी और उसके बाद उनकी रिहाई हो गई। सरकार के वकील ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता भ्रामक बयानबाजी कर रहा है और वकील ने स्वयं जांच अधिकारी के साथ वाट्सएप पर बातचीत शुरू की थी। सीबीआई को जांच सौंपने के विरोध में राज्य सरकार के वकील ने तर्क दिया कि हत्या का यह मामला एसटीएफ द्वारा पहले से ही देखा जा रहा है।
इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “तो मामला क्या है? सीबीआई इसकी बेहतर जांच करेगी।” कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर संज्ञान लिया है और याचिका की सुनवाई बृहस्पतिवार के लिए सूचीबद्ध कर दी है। यह मामला वकील की गिरफ्तारी, हिरासत में दुर्व्यवहार के आरोपों और एक निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर केंद्रित है।
