असम में एसटी दर्जे का विरोध: बीटीसी सचिवालय में छात्रों ने की तोड़फोड़
असम सरकार द्वारा राज्य के छह प्रमुख समुदायों – ताई अहोम, चुटिया, मोरान, मोटोक, कोच-राजबोंगशी और टी ट्राइब्स (आदिवासी) – को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने के प्रस्ताव पर मंत्रियों के समूह (जीओएम) की रिपोर्ट को मंजूरी देने के निर्णय के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। शनिवार को बोडोलैंड विश्वविद्यालय के छात्रों ने कोकराझार स्थित बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद (बीटीसी) सचिवालय के सभा भवन में घुसकर तोड़फोड़ की।
सूत्रों के अनुसार, आदिवासी छात्रों के एक समूह ने विश्वविद्यालय परिसर से बीटीसी सचिवालय तक लगभग छह किलोमीटर लंबा मार्च निकाला। उन्होंने सुरक्षा अवरोधकों को पार करते हुए सचिवालय के सभा भवन में प्रवेश किया और वहां मौजूद कुर्सियों, फर्नीचर और अन्य संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। इस घटना के बाद मौके पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है, लेकिन क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है और स्थिति को नियंत्रण में लाना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
यह पहली बार नहीं है जब इस फैसले का विरोध हुआ है। राज्य मंत्रिमंडल के इस फैसले के विरोध में बोडोलैंड विश्वविद्यालय के छात्रों ने गुरुवार को भी परिसर में विरोध प्रदर्शन किया था। उन्होंने अपने गुस्से को व्यक्त करते हुए तीसरे सेमेस्टर की अंतिम परीक्षाओं का भी बहिष्कार किया था। छात्रों का आरोप है कि एसटी दर्जे के विस्तार से उनकी पहचान और अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जबकि सरकार का कहना है कि यह निर्णय इन समुदायों के लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करेगा। इस मुद्दे पर विभिन्न आदिवासी संगठनों के बीच भी मतभेद देखे जा रहे हैं, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।
