मेरठ में 380 सरकारी कर्मियों का वेतन रुका, ई-ऑफिस इस्तेमाल न करने पर कार्रवाई
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में सरकारी कामकाज में लापरवाही और ई-ऑफिस प्रणाली के प्रति उदासीनता पर मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) नूपुर गोयल ने सख्त रुख अपनाया है। ई-ऑफिस का उपयोग न कर पत्रावलियों में काम करने वाले 37 विभागों के 380 अधिकारियों और कर्मचारियों का नवंबर माह का वेतन रोक दिया गया है। साथ ही, संबंधित विभागाध्यक्षों को नोटिस जारी कर जवाब भी तलब किया गया है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव के स्पष्ट आदेशों के अनुपालन में की गई है।
मुख्य विकास अधिकारी नूपुर गोयल ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा सभी विभागों के कामकाज को सुचारू और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से ई-ऑफिस प्रणाली लागू की गई है। इस प्रणाली के तहत, किसी भी फाइल को ई-ऑफिस सिस्टम के माध्यम से ही एक पटल से दूसरे पटल पर भेजा जाना है और अधिकारियों को वहीं से उसका निस्तारण करना है। हालांकि, पिछले तीन महीनों (21 अगस्त से 20 नवंबर) की समीक्षा में यह पाया गया कि 37 विभागों के कई अधिकारी और कर्मचारी इस व्यवस्था का पालन नहीं कर रहे हैं। इन लोगों ने न तो ई-ऑफिस पर लॉग इन किया और न ही किसी फाइल को सिस्टम के माध्यम से आगे बढ़ाया, जिससे सरकारी कार्यों में अनावश्यक विलंब हो रहा था।
जिन विभागों के प्रमुखों से स्पष्टीकरण मांगा गया है, उनमें बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय, मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ), मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, सहायक निबंधक सहकारिता, जिला समन्वयक एनआरएलएम, जिला विकास अधिकारी, उप निदेशक कृषि, जिला वन अधिकारी (डीएफओ), डायट मवाना, जिला कृषि अधिकारी, जिला आडिट अधिकारी, जिला कमांडेंट होमगार्ड, जिला दिव्यांग कल्याण अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला खादी और ग्रामोद्योग अधिकारी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, समाज कल्याण अधिकारी, जल निगम ग्रामीण अधिशासी अभियंता, जल निगम शहरी अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड एक्सईएन, ग्रामीण अभियंत्रण एक्सईएन, नलकूप खंड पूर्व एक्सईएन, जिला उद्योग केंद्र महाप्रबंधक, सिंचाई कार्यशाला, लघु सिंचाई, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, आलू अनुसंधान केंद्र, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक और यूनानी अधिकारी, समग्र शिक्षा अभियान, मृदा संरक्षण अधिकारी, जिला पंचायत कार्यालय शामिल हैं। इसके अलावा, खंड शिक्षा अधिकारी मवाना और मेरठ, तथा खंड विकास अधिकारी दौराला, हस्तिनापुर, जानी, खरखौदा, माछरा, मवाना, मेरठ, परीक्षितगढ़, रजपुरा, रोहटा, सरधना, सरूरपुर खुर्द के अधिकारियों से भी जवाब मांगा गया है।
यह कार्रवाई सरकारी तंत्र में जवाबदेही सुनिश्चित करने और आधुनिक तकनीक को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उम्मीद है कि इस कदम से अन्य विभागों के अधिकारी भी ई-ऑफिस प्रणाली का गंभीरता से पालन करेंगे और सरकारी कामकाज में तेजी आएगी।
