सिद्धार्थनगर में सचिवों का धरना, ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली के विरोध में ठप हुए विकास कार्य
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में ग्राम पंचायत अधिकारियों ने सरकार की ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। डुमरियागंज और भनवापुर ब्लॉक मुख्यालयों पर शुक्रवार को बड़ी संख्या में सचिव धरने पर बैठ गए। उत्तर प्रदेश ग्राम पंचायत अधिकारी संघ एवं ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन के प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर आयोजित इस धरने में सचिवों ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन उपस्थिति की व्यवस्था ग्रामीण परिवेश की वास्तविकताओं से कोसों दूर है और इसे लागू करने से उन पर अनावश्यक दबाव बढ़ रहा है।
धरने के कारण ब्लॉक मुख्यालयों पर कामकाज ठप रहा, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ा। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने आए लोग, परिवार रजिस्टर की नकल लेने पहुंचे ग्रामीण और अन्य सरकारी दस्तावेज प्राप्त करने की उम्मीद लेकर आए लोग निराश लौटे। सचिवों ने यह भी घोषणा की कि अब वे क्षेत्र भ्रमण के लिए निजी वाहनों का इस्तेमाल नहीं करेंगे, जिससे विकास कार्यों की गति और धीमी पड़ने की आशंका है।
संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के अनुसार, सुबह-शाम दो बार ऑनलाइन हाजिरी लगाने का आदेश जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाता। एक सचिव को चार से नौ गांवों में विकास कार्यों की निगरानी करनी होती है, ऐसे में नेटवर्क की समस्या वाले क्षेत्रों में इस व्यवस्था को लागू करना असंभव है। इसके अतिरिक्त, सचिवों पर राजस्व, स्वास्थ्य, पशु चिकित्सा, समाज कल्याण, जल निगम और आपदा प्रबंधन जैसे कई अन्य विभागों के अतिरिक्त कार्यभार भी थोपे जाते हैं, जिसके चलते वे अपने मूल 29 प्रकार के विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते।
सचिवों का कहना है कि लगातार बढ़ते दायित्वों और दबाव के चलते कई साथी तनावग्रस्त हो रहे हैं। इस समस्या को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित एक 10 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन उच्चाधिकारियों को सौंपा गया है। धरने में शामिल सचिवों ने इस व्यवस्था को अव्यवहारिक बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।
