सीबीएसई की नई मार्किंग स्कीम: छात्रों को तैयारी में मिलेगी आसानी, परीक्षा का दबाव कम
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा जारी की गई नई मार्किंग स्कीम छात्रों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है। इस नई योजना के तहत, छात्रों को अब विषयवार अंक विभाजन को समझने में काफी आसानी होगी। इससे उन्हें यह स्पष्ट हो जाएगा कि किस विषय के किस हिस्से पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है, जिससे उनकी तैयारी अधिक प्रभावी हो सकेगी।nnइस नई स्कीम का सीधा लाभ देश भर के सीबीएसई स्कूलों में पढ़ रहे लाखों छात्रों को मिलेगा। विशेष रूप से, भागलपुर जैसे शहरों में जहां बड़ी संख्या में छात्र सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में अध्ययन कर रहे हैं, वहां के लगभग 12,000 छात्रों को इस बदलाव से फायदा होगा। बोर्ड ने इस नई योजना को स्कूलों के प्राचार्यों तक पहुँचाने के लिए एक वेबिनार का भी आयोजन किया, ताकि वे इसे छात्रों तक बेहतर ढंग से समझा सकें।nnबोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, नई मार्किंग स्कीम छात्रों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। प्रैक्टिकल परीक्षाओं और इंटरनल असेसमेंट के अंकों में बढ़ोतरी की गई है, जिससे छात्रों पर बोर्ड परीक्षा का समग्र दबाव कम होगा। अब कुल अंकों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा स्कूल स्तर पर ही छात्र के प्रदर्शन के आधार पर सुनिश्चित हो जाएगा। इसके अतिरिक्त, वर्ष में दो बार परीक्षा आयोजित करने का निर्णय छात्रों को अपने प्रदर्शन में सुधार करने का एक अतिरिक्त अवसर प्रदान करेगा। यदि कोई छात्र पहली बार में अपने अंकों से संतुष्ट नहीं है, तो वह दूसरी बार परीक्षा देकर अपने प्रदर्शन को बेहतर बना सकता है।nnजारी की गई नई स्कीम के अनुसार, कक्षा 10वीं में कुल 83 विषयों की परीक्षा आयोजित की जाएगी। हिंदी, सामाजिक विज्ञान, गणित (स्टैंडर्ड और बेसिक), विज्ञान और अंग्रेजी जैसे प्रमुख विषयों के पेपर 100 अंकों के होंगे। इन विषयों में, तीन घंटे की थ्योरी परीक्षा के लिए 80 अंक निर्धारित हैं, जबकि 20 अंक इंटरनल असेसमेंट के रूप में दिए जाएंगे। वहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), कंप्यूटर एप्लीकेशन और आईटी जैसे विषयों की परीक्षा दो घंटे की होगी, जिसमें 50 अंक थ्योरी और 50 अंक प्रैक्टिकल के लिए रखे गए हैं।nnइसी प्रकार, कक्षा 12वीं के लिए 121 विषयों की परीक्षा होगी। भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान जैसे विज्ञान विषयों के थ्योरी पेपर 70 अंकों के होंगे। कक्षा 10वीं की तरह ही, कक्षा 12वीं में भी वर्ष में दो बार बोर्ड परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी, जिससे छात्रों को परीक्षा सुधारने का अवसर मिलेगा।”
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