भारत की आर्थिक प्रगति में FTA की भूमिका: निर्यात और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
भारत 2026 में दुनिया के प्रमुख देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। इन समझौतों का उद्देश्य भारत को निर्यात, सेवा, निवेश और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में एक नई आर्थिक शक्ति बनाना है। हाल ही में भारत के निर्यात में 15.52 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है, जिसका श्रेय बड़े पैमाने पर इन FTA को दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि ये समझौते भारत को 2027 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेंगे।
इसी क्रम में, भारत ने हाल ही में ओमान के साथ एक व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) किया है। इस समझौते के तहत भारत के 98 प्रतिशत निर्यात को ओमान में शून्य शुल्क पर पहुंच मिलेगी। इससे भारतीय कपड़ा, रत्न-आभूषण, दवाइयां और कृषि उत्पादों को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। विशेष रूप से, भारत से लगभग 3.64 अरब डॉलर के निर्यात पर लगने वाला 5% शुल्क अब शून्य हो जाएगा। बदले में, भारत ने ओमान से आने वाले खजूर और पेट्रोकेमिकल जैसे उत्पादों पर आयात शुल्क में कमी की है।
इस समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू पेशेवर आवाजाही है। पहली बार ओमान ने भारतीय पेशेवरों के लिए व्यापक रियायतें दी हैं। ‘इंट्रा-कॉर्पोरेट ट्रांसफरी’ का कोटा 20% से बढ़ाकर 50% कर दिया गया है। इसके अलावा, आईटी, बिजनेस सर्विसेज और स्वास्थ्य सेवाओं में भारतीय कंपनियां अब ओमान में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) कर सकेंगी। इससे भारतीय निर्यातकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और पूर्वी यूरोप तक माल पहुंचाने में लगने वाले समय और लागत में कमी आएगी।
ओमान के अलावा, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में भारत-न्यूजीलैंड FTA को भी मंजूरी दी है। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश प्रवाह को बढ़ाने के साथ-साथ आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर केंद्रित है। भविष्य में भारत अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, कनाडा और अन्य देशों के साथ भी FTA को अंतिम रूप देने की तैयारी में है। इन समझौतों में केवल उत्पाद निर्यात ही नहीं, बल्कि सेवा क्षेत्र से संबंधित निर्यात भी शामिल होंगे।
भारत के सेवा निर्यात में बढ़ती विशेषज्ञता के कारण, इन FTA से प्रशिक्षित भारतीय श्रमिकों और पेशेवरों के लिए विदेशों में काम के अवसर बढ़ेंगे। इसके साथ ही, केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित नए श्रम कानून भी इन FTA के लाभों को अधिकतम करने में सहायक होंगे। ये कानून श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करते हुए उद्योगों को भी राहत देंगे, जिससे भारत का व्यापारिक परिदृश्य मजबूत होगा।
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