यूपी यूनिवर्सिटी में रिसर्चर करेंगे मूल्यांकन, परीक्षा प्रक्रिया में बड़ा बदलाव
उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। इस नई पहल के तहत, पीएचडी कर रहे शोधार्थी अब शिक्षकों के साथ मिलकर विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करेंगे। यह समानांतर मूल्यांकन प्रक्रिया शोधार्थियों द्वारा दिए गए अंकों की गुणवत्ता और सटीकता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जाएगी।
इस व्यवस्था के साथ ही, यह भी अध्ययन किया जाएगा कि औसतन एक छात्र सभी प्रश्नों के उत्तर कितने पृष्ठों में लिखता है। यह विश्लेषण भविष्य में उत्तर पुस्तिकाओं की संरचना को अधिक व्यावहारिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने में मदद करेगा, जिससे कागज की अनावश्यक खपत को रोका जा सके।
हाल ही में इस प्रस्ताव पर राज्यपाल स्तर पर एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें योजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण हुआ। बैठक में सीमित संख्या में उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कराने और औसत पृष्ठ निर्धारण जैसे बिंदुओं पर भी चर्चा हुई।
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू), जो प्रदेश के लगभग 750 इंजीनियरिंग संस्थानों को संबद्धता देता है, इस नई व्यवस्था की शुरुआत करने जा रहा है। विश्वविद्यालय पहले से ही उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर डिजिटल माध्यम से मूल्यांकन करता है। अब एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत, चयनित उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन परीक्षकों के साथ-साथ पीएचडी शोधार्थियों से भी कराया जाएगा। दोनों के अंकों की तुलना करके मूल्यांकन में अंतर का आकलन किया जाएगा।
एकेटीयू के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय के अनुसार, पायलट प्रोजेक्ट के तहत बीटेक पाठ्यक्रम की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पीएचडी शोधार्थियों से कराया जाएगा। यदि यह प्रयोग सफल होता है, तो इसे प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों में भी लागू किया जा सकता है। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर शोधार्थियों के अनुभव और निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं, जिन्हें विश्वविद्यालय प्रशासन समानांतर मूल्यांकन और सतत निगरानी से दूर करने का प्रयास करेगा। यह पहल सफल होने पर प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में परीक्षा मूल्यांकन का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।
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