पुनर्वास विवि अब खुद बनाएगा कृत्रिम अंग किट, दिव्यांगों को मिलेगी बड़ी राहत
डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में अब कृत्रिम अंगों के लिए किट परिसर में ही बनाई जा सकेगी। अभी तक विवि इन किट्स को बाजार से खरीदता था। इसके मद्देनजर विश्वविद्यालय और सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सिपेट) के बीच फरवरी में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) प्रस्तावित है। इस एमओयू के बाद विवि में सिपेट के सहयोग से कृत्रिम पैर का पंजा सहित अन्य भाग (पार्ट्स) की निर्माण प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
इस पहल से दिव्यांगजनों को समय पर और बेहतर गुणवत्ता वाले कृत्रिम अंग उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार आएगा। साथ ही, यह विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को आधुनिक 3डी प्रिंटिंग और कम्प्यूटर एडेड डिजाइन (कैड) जैसी तकनीकों में प्रशिक्षित करेगा, जिससे उनके रोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ेंगे।
हाल ही में सिपेट में आयोजित एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय और सिपेट के अधिकारियों के बीच इस संबंध में विस्तृत चर्चा हुई। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के एमपीओ और बीपीओ पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को कैड-कैम और थ्रीडी प्रिंटिंग की तकनीकी ट्रेनिंग दी गई, ताकि वे डिजिटल तकनीक के माध्यम से आधुनिक कृत्रिम अंग तैयार कर सकें। कुलपति आचार्य संजय सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों के जीवन को आसान और आत्मनिर्भर बनाना है।
