परिवहन विभाग में भर्ती घोटाला: नौकरी के नाम पर रिश्वत, दो महीने में निकाला
लखनऊ में परिवहन विभाग के तहत ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाली कंपनियों पर नौकरी देने के बदले रिश्वत लेने और कुछ ही महीनों में कर्मचारियों को बिना किसी कारण के निकाल देने के गंभीर आरोप लगे हैं। मंगलवार को बड़ी संख्या में ऐसे पीड़ित कर्मचारी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर कार्यालय पहुंचे और अपनी आपबीती सुनाई। कमिश्नर आशुतोष निरंजन ने उन्हें आरटीओ आईटी सेल के अजय यादव के पास भेजा, जहां पीड़ितों ने कंपनी द्वारा किए जा रहे शोषण और अचानक नौकरी से हटाए जाने की शिकायत दर्ज कराई।
यह मामला उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह द्वारा डीएल बनाने की एकाधिकार खत्म करने के लिए तीन कंपनियों – सिल्वर टच, फो कॉम नेट और रोजमार्टा – को दिए गए ठेके से जुड़ा है। इन कंपनियों ने न केवल पुराने कर्मचारियों को रखा, बल्कि नई भर्तियां भी कीं। पीड़ितों का आरोप है कि नई और पुरानी, दोनों तरह की भर्तियों में प्रत्येक कर्मचारी से रिश्वत ली गई। भर्ती के बाद, किसी को एक महीने तो किसी को दो महीने में बिना कोई गलती बताए नौकरी से निकाल दिया गया।
आरोप यह भी हैं कि कंपनियों ने कंप्यूटर और अन्य उपकरण भी कर्मचारियों से ही खरीदवाए। पैसे लेने के बाद मैनेजर भी कथित तौर पर गायब हो गए हैं। अब, नौकरी पर वापस रखने के नाम पर कर्मचारियों से फिर से पैसे मांगे जा रहे हैं। इस तरह की घटनाएं सरकारी विभागों से जुड़े ठेकेदारों द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार को उजागर करती हैं और आम जनता के लिए चिंता का विषय हैं।
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