सोरोंजी में रंगपंचमी: मां गंगा संग खेलेंगे होली, देवों के आगमन की मान्यता
तीर्थनगरी सोरों जी में चैत्र कृष्ण पक्ष पंचमी को मनाई जाने वाली रंगपंचमी इस वर्ष 8 मार्च को श्रद्धा, आस्था और भव्यता के साथ मनाई जाएगी। “आओ खेलें गंगा-वराह संग होली” के आह्वान के साथ आयोजित होने वाला यह पारंपरिक रंगोत्सव न केवल स्थानीय लोगों बल्कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगा। इस दिन को देवताओं का रंगोत्सव कहा जाता है, जहाँ मान्यता है कि देवशक्तियां पृथ्वी पर अवतरित होकर भक्तों के साथ रंग खेलती हैं।
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस दिन तीर्थराज सोरों जी के गंगाघाट और वराह मंदिर परिसर में देवशक्तियां साक्षात उपस्थित रहती हैं। रंग, गुलाल और भक्ति के संगम से पूरा नगर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है। सुबह से ही श्रद्धालु गंगा स्नान कर भगवान वराह और गंगा मैया का पूजन-अर्चन करते हैं, जिसके बाद रंगोत्सव का शुभारंभ होता है। किंवदंती के अनुसार यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के दिव्य रंगोत्सव का प्रतीक है, जब राधा की प्रार्थना पर भगवान श्रीकृष्ण ने सोरों जी में रंगोत्सव मनाया था।
रंगपंचमी के अवसर पर सोरों जी में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है। आयोजन समिति द्वारा भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी, जिसमें सुसज्जित झांकियां नगर भ्रमण करेंगी। भगवान वराह, राधा-कृष्ण और गंगा मैया की झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालु पुष्पवर्षा कर स्वागत करेंगे। पूरा नगर भगवा, गुलाबी और केसरिया रंगों से रंगा नजर आएगा। गंगाघाट और भगवान वराह मंदिर परिसर में श्रद्धालु अबीर-गुलाल अर्पित कर आध्यात्मिक रंगोत्सव का आनंद लेंगे। “आओ खेलें वराह संग होली” का आवाहन जन-जन को आस्था से जोड़ रहा है। आयोजन समिति ने रथयात्रा, झांकियों और भक्ति संगीत को लेकर तैयारियां पूरी कर ली हैं। यह उत्सव नगर की पहचान बन चुका है और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक है, जहाँ विभिन्न वर्गों के लोग प्रेम और समरसता का संदेश देते हुए एक साथ आते हैं।
