रामानंद सागर की Ramayan के 39 साल पूरे, जानिए क्यों आज भी कालजयी है यह शो
25 जनवरी 1987 को जब रामानंद सागर की ‘रामायण’ का पहला एपिसोड दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह शो भारतीय टेलीविजन के इतिहास में एक ऐसी मिसाल कायम करेगा, जिसकी लोकप्रियता आज 39 साल बाद भी बरकरार है। यह वह दौर था जब हर रविवार सुबह 9:30 बजे देश की सड़कें सुनसान हो जाती थीं। लोग अपने घरों में टीवी सेट के सामने बैठ जाते थे और ऐसा लगता था मानो पूरा देश थम सा गया हो।
आज भी ‘रामायण’ को दर्शक यूट्यूब और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर देखना पसंद करते हैं। इस शो की 39वीं वर्षगांठ पर, मेकर्स ने उन पांच प्रमुख कारणों को याद किया है जो इसे एक कालजयी कृति बनाते हैं।
ये हैं वो 5 कारण जो ‘रामायण’ को बनाते हैं कालजयी
1. संवाद जो जीवन सिखाते हैं: शो के संवाद सिर्फ कहानी नहीं सुनाते, बल्कि जीवन के गहरे दर्शन और मूल्यों को सरल शब्दों में प्रस्तुत करते हैं।
2. संगीत जो आत्मा को छू जाता है: ‘रामायण’ का संगीत और भजन आज भी श्रोताओं को शांति और भक्ति का अनुभव कराते हैं।
3. कलाकारों का अभिनय: अरुण गोविल (राम), दीपिका चिखलिया (सीता), सुनील लहरी (लक्ष्मण) और दारा सिंह (हनुमान) जैसे कलाकारों ने अपने किरदारों को इतनी जीवंतता से निभाया कि दर्शक उन्हें वास्तविक मानने लगे।
4. धर्म का दर्शन: शो के दृश्यों में धर्म, कर्तव्य और नैतिकता का ऐसा समावेश था जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करता था।
5. समय से परे संदेश: ‘रामायण’ में निहित संदेश, जैसे सत्य की जीत और बुराई पर अच्छाई की विजय, आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने 39 साल पहले थे।
UP crime news: 12 राज्यों में 65 फर्जी फर्म बनाकर बेच रहा था कोडाइन सिरप, 50 हजार का इनामी गिरफ्तार
यूपी में UGC bill के विरोध में प्रदर्शन, युवाओं ने की बिल वापस लेने की मांग
यूपी की 10 हस्तियों को Padma Awards से नवाजा गया, जानें कौन-कौन हैं ये विभूतियां
UP के 10 लोगों को Padma Awards, एक को पद्मभूषण; योगी ने दी बधाई
लखनऊ में डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा- मां ही बच्चे की पहली गुरु, आत्मविश्वास का आधार
प्रधानपति ने घर में घुसकर महिला से की मारपीट, Sikandarpur Vaishya में FIR दर्ज
सिकंदरपुर वैश्य वैश्य में प्रधानपति पर महिला से मारपीट, छेड़छाड़ का आरोप; Police में शिकायत दर्ज
चित्रकूट में Ram Katha का भावुक प्रसंग, भरत मिलाप सुनकर भावुक हुए श्रोता
