रेलवे में तत्काल टिकटों का अकाल, 40% टिकट दलालों के हाथ
रेलवे में तत्काल टिकटों की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जहाँ ट्रेन छूटने से 24 घंटे पहले बुक होने वाले टिकट भी मिलना मुश्किल हो गया है। गोरखपुर में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है, जहाँ यात्रियों को कन्फर्म टिकट के लिए 20 घंटे तक लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, लगभग 40 प्रतिशत तत्काल टिकट दलालों के हाथ में जा रहे हैं, जो रेलवे के ऑनलाइन टिकटिंग सिस्टम में सेंध लगाकर तेजी से टिकट बुक कर रहे हैं।
आरक्षण काउंटर पर सुबह दस बजे तत्काल टिकट की बुकिंग शुरू होती है, लेकिन इसके लिए लोग पिछले दिन शाम चार बजे से ही लाइन लगाना शुरू कर देते हैं। दूर-दराज के गांवों से आने वाले यात्री लिस्ट में अपना नाम दर्ज कराते हैं और कुछ तो आरक्षण कार्यालय के सामने ही रात गुजारने को मजबूर होते हैं। कई यात्री स्टेशन परिसर में रात भर जागकर इंतजार करते हैं, लेकिन अंत में उन्हें केवल वेटिंग टिकट ही मिल पाता है। गुरुवार को गोरखपुर आरक्षण काउंटर पर टिकट के लिए लाइन में लगे यात्रियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई, जो अब आम बात हो गई है।
जानकारों का कहना है कि यह समस्या साल भर बनी रहती है, खासकर त्योहारों के बाद स्थिति और भी खराब हो जाती है। दिल्ली, पंजाब, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे प्रमुख शहरों की ओर जाने वाली ट्रेनों में किसी भी श्रेणी का कन्फर्म टिकट मिलना लगभग असंभव हो गया है। ऐसे में यात्री तत्काल टिकट का सहारा ले रहे हैं, लेकिन वहाँ भी उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है।
सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम (क्रिस) की टिकटिंग व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि टिकटों के अवैध कारोबारी इस सिस्टम में पूरी तरह सेंध लगा चुके हैं। उनके पास ऐसे सॉफ्टवेयर हैं जो रेलवे के आधिकारिक सिस्टम से कहीं अधिक तेज गति से काम करते हैं। जहाँ रेलवे काउंटरों पर बैठे कर्मचारी एक मिनट में एक कन्फर्म टिकट बुक कर पा रहे हैं, वहीं दलाल दूर बैठे ही छह से बारह कन्फर्म टिकट बुक कर ले रहे हैं। इसमें निजी और आईआरसीटीसी के एजेंट भी शामिल बताए जा रहे हैं।
रेलवे बोर्ड के निर्देशानुसार, जुलाई से ही तत्काल टिकटों की कालाबाजारी रोकने के लिए नई ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) व्यवस्था लागू होनी थी, लेकिन यह व्यवस्था आज तक लागू नहीं हो पाई है। इस देरी का फायदा उठाते हुए, शहर, कस्बों और गांवों में बैठे अवैध कारोबारी विभिन्न लॉगिन आईडी का उपयोग करके एक साथ दर्जनों कन्फर्म तत्काल टिकट बुक कर रहे हैं और फिर उन्हें यात्रियों से मुंहमांगी कीमत पर बेच रहे हैं। आम यात्री जहाँ कन्फर्म टिकट के लिए तरस रहे हैं, वहीं दलाल मुनाफा कमा रहे हैं। रेलवे को भले ही पूरा किराया मिल रहा हो, लेकिन आम यात्रियों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।
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