रेलवे जंक्शन की दूसरी एंट्री विकास कार्य अधर में, गंदगी और अंधेरे का साम्राज्य
रेलवे जंक्शन की दूसरी एंट्री को विकसित करने और उसे एक धार्मिक पहचान देने की योजना सिरे नहीं चढ़ पा रही है। नगर निगम द्वारा यात्रियों को बेहतर सुविधा देने और एंट्री को आकर्षक बनाने का आश्वासन रेलवे अधिकारियों को दिया गया था, लेकिन हकीकत में इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है।
पूर्व स्टेशन निदेशक एन.पी. सिंह ने नया बस स्टैंड के सामने से जंक्शन रेलवे स्टेशन की दूसरी एंट्री तक जाने वाले रास्ते को एक धार्मिक स्वरूप देने का प्रस्ताव नगर निगम के अधिकारियों के समक्ष रखा था। इस प्रस्ताव पर नगर निगम के अधिकारी सहमत भी हो गए थे। योजना के तहत, प्रवेश द्वार को पारंपरिक धार्मिक शैली में डिजाइन करने और रास्ते में प्रकाश की समुचित व्यवस्था करने का आश्वासन दिया गया था। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए तत्कालीन स्टेशन निदेशक और नगर निगम के अधिकारियों ने मिलकर सर्वे भी पूरा कर लिया था और रास्ते के किनारों पर विभिन्न निर्माणों के लिए स्थान भी चिन्हित कर लिए गए थे।
हालांकि, स्टेशन निदेशक एन.पी. सिंह का प्रयागराज तबादला होने के साथ ही इस विकास परियोजना पर ग्रहण लग गया। उनके जाने के बाद से यह कार्य अधर में लटक गया और कोई भी अधिकारी इसे आगे बढ़ाने के लिए गंभीर नजर नहीं आया। वर्तमान स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। जंक्शन की दूसरी एंट्री की ओर जाने वाले रास्ते के दोनों ओर कूड़े के ढेर लगे हुए हैं, जिससे न केवल दुर्गंध फैलती है बल्कि गंदगी का साम्राज्य भी स्थापित हो गया है। रात्रि के समय यह रास्ता पूरी तरह अंधेरे में डूब जाता है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होते हैं।
मालगोदाम रोड पर निवास करने वाले स्थानीय लोगों ने इस अव्यवस्था के खिलाफ कई बार रेलवे और नगर निगम के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर समस्या से अवगत कराया है। इसके बावजूद, उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इस संबंध में वर्तमान स्टेशन निदेशक, एपी श्रीवास्तव से बात करने पर उन्होंने कहा कि द्वितीय एंट्री को लेकर पूर्व में नगर निगम को क्या प्रस्ताव दिया गया था, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। यह बयान योजना के ठंडे बस्ते में जाने और जिम्मेदार अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी को दर्शाता है।
