रबी फसलों में सिंचाई से पहले यूरिया न डालें, किसानों को नुकसान का अंदेशा
जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश मिश्र ने रबी फसलों, विशेषकर गेहूं की सिंचाई से पहले यूरिया का छिड़काव करने वाले किसानों को एक महत्वपूर्ण सलाह दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सिंचाई से पूर्व यूरिया का छिड़काव करना पूरी तरह से अवैज्ञानिक है और इससे किसानों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ता है।
सूत्रों के अनुसार, जब किसान सिंचाई से पहले यूरिया का छिड़काव करते हैं, तो यूरिया पानी में बहुत जल्दी घुल जाता है। यह घुला हुआ यूरिया पानी के साथ जमीन में काफी गहराई तक, लगभग एक से डेढ़ मीटर नीचे चला जाता है। इस प्रक्रिया में, यूरिया से मिलने वाला मुख्य पोषक तत्व, नाइट्रोजन, पौधों की जड़ों तक पहुँच ही नहीं पाता। चूँकि नाइट्रोजन पौधों की वृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक है, इसलिए इसका न मिलना फसल के लिए हानिकारक होता है।
इसके अलावा, इस अवैज्ञानिक तरीके से यूरिया का प्रयोग भूजल को भी प्रदूषित करता है। जब यूरिया पानी के साथ जमीन में रिसता है, तो वह भूजल में मिल जाता है, जिससे उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है। कुछ मात्रा में यूरिया नाइट्रस ऑक्साइड के रूप में परिवर्तित होकर, सिंचाई के पानी के भाप बनने के साथ वायुमंडल में भी मिल जाता है, जो वायु प्रदूषण का कारण बनता है। इस प्रकार, सिंचाई से पूर्व यूरिया का छिड़काव केवल पैसे की बर्बादी नहीं है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी चिंता का विषय है।
जिला कृषि अधिकारी ने किसानों को वैज्ञानिक विधि अपनाने की सलाह दी है। उनके अनुसार, किसानों को पहली सिंचाई हल्की करनी चाहिए और खेत में पर्याप्त ओट (नमी सूखने के बाद की स्थिति) आने पर ही, वैज्ञानिक संस्तुतियों के अनुसार यूरिया का छिड़काव करना चाहिए। यह सुनिश्चित करेगा कि यूरिया पौधों द्वारा प्रभावी ढंग से अवशोषित हो सके।
उन्होंने यह भी बताया कि यदि गेहूं की फसल में खरपतवारों की अधिकता हो, तो किसानों को पहले खरपतवारनाशी रसायन का छिड़काव करना चाहिए। पहली सिंचाई के 4 से 5 दिन बाद खरपतवारनाशी का प्रयोग करें और उसके तीन से चार दिन बाद ही यूरिया डालें। समय पर खरपतवारों का नियंत्रण फसल की अच्छी पैदावार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन सरल वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर किसान न केवल अपनी फसल को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि पैसे और पर्यावरण की भी रक्षा कर सकते हैं।
