राम मंदिर का धर्म ध्वज: चार साल तक मौसम भी बेअसर, जानें इसकी खासियतें
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भव्य मुख्य शिखर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फहराया गया धर्म ध्वज, देश की प्रतिष्ठित रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई, ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड (जीआइएल) की आयुध पैराशूट फैक्ट्री, कानपुर की अनूठी उपलब्धि है। यह धर्म ध्वजा न केवल अपनी मजबूती के लिए जानी जाती है, बल्कि इसके निर्माण में प्रयुक्त सामग्री का प्रयोगशाला में गहन परीक्षण किया गया है, जिसके परिणाम पूरी तरह से मानक के अनुरूप पाए गए हैं।nnइस विशेष धर्म ध्वजा की लंबाई 18 फीट और ऊंचाई 9 फीट है, जिसका वजन मात्र दो किलोग्राम है। इस पर कोविदार वृक्ष और सूर्य के अंदर ‘ओम’ का प्रतीक चिह्न अंकित है। पैराशूट कपड़े से निर्मित होने के कारण यह ध्वजा अत्यंत मजबूत होने के साथ-साथ हल्की भी है। इस विशेषता के चलते इसे मंदिर के शिखर जैसी इच्छित ऊंचाई पर सरलता से ले जाकर फहराया जा सका।nnश्रीराम मंदिर ट्रस्ट के सूत्रों के अनुसार, इस धर्म ध्वजा को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि यह विपरीत मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों का भी सामना कर सके। इसमें विभिन्न प्रकार के विशेष कपड़ों, टेप और धागों का उपयोग किया गया है। इस विशेष निर्माण के कारण, यह धर्म ध्वजा तीन से चार साल तक किसी भी तरह के मौसम से अप्रभावित रहेगी। ट्रस्ट के पदाधिकारियों को कम वजन और अत्यधिक मजबूती वाली धर्म ध्वजा की आवश्यकता थी, जिसे जीआइएल ने सफलतापूर्वक पूरा किया।nnग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड की टीम ने इस धर्म ध्वजा को 18 नवंबर को ही श्रीराम मंदिर ट्रस्ट को सौंप दिया था। ट्रस्ट पदाधिकारियों के साथ गहन विचार-विमर्श के बाद इस मानकीकृत धर्म ध्वजा का निर्माण किया गया। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने भी इस रक्षा संगठन के इस महत्वपूर्ण योगदान की प्रशंसा की है। उल्लेखनीय है कि जीआइएल ने मात्र दो सप्ताह के अल्प समय में इस धर्म ध्वजा का निर्माण कर ट्रस्ट को सौंप दिया था, जिसके लिए संस्थान के कर्मचारियों ने दिन-रात अथक परिश्रम किया।nnग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड, रक्षा मंत्रालय के अधीन भारत सरकार का एक उपक्रम है, जो देश और विदेश में उच्च गुणवत्ता वाले पैराशूट के निर्माण के लिए ख्याति प्राप्त है। इसकी उत्पादन इकाई, आयुध पैराशूट निर्माणी (ओपीएफ) के कुशल कर्मचारियों ने अत्यंत सात्विकता और पवित्रता के साथ इस धर्म ध्वजा को तैयार किया। जीआइएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) एमसी बालासुब्रमण्यम ने कहा कि उनका संगठन राष्ट्र के प्रति हमेशा समर्पित रहा है और राम मंदिर के लिए यह ध्वजा तैयार करना उनके लिए गौरव का क्षण है।”
गौरव की अनुभूति का क्षण था।”
अनुभूति देने वाला रहा।”
अनुभूति है।
