राम जन्मभूमि परिसर में बदलेंगे विशिष्ट दर्शनार्थियों के प्रवेश द्वार
अयोध्या में रामलला के दर्शन करने आने वाले विशिष्टजनों के लिए राम जन्मभूमि परिसर में प्रवेश का मार्ग शीघ्र ही बदलने वाला है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट परिसर में चार भव्य प्रवेश द्वारों का निर्माण करा रहा है, जिनका नामकरण चार प्रमुख संतों के नाम पर किया गया है।
वर्तमान में, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री जैसे अति विशिष्टजनों को आद्य शंकराचार्य नामक वीवीआईपी गेट संख्या-11 से प्रवेश दिया जाता है। अन्य विशिष्टजनों को अभी गेट संख्या-तीन, जिसे जगद्गुरु मध्वाचार्य द्वार नाम दिया गया है, से प्रवेश मिल रहा है। लेकिन, अब ट्रस्ट ने जगद्गुरु मध्वाचार्य द्वार के भव्य निर्माण का निर्णय लिया है, जिसका कार्य अगले पखवाड़े में शुरू होने की उम्मीद है। इस निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम को सौंपी गई है।
परिसर के चार प्रवेश द्वारों का नामकरण जगद्गुरु रामानंदाचार्य (मुख्य प्रवेश द्वार), जगद्गुरु मध्वाचार्य (गेट संख्या-तीन), आद्य शंकराचार्य (गेट संख्या-11) और जगद्गुरु रामानुजाचार्य (गेट संख्या-पांच, उत्तरी द्वार) के नाम पर किया गया है। इनमें से आद्य शंकराचार्य और जगद्गुरु रामानुजाचार्य द्वारों का निर्माण हाल ही में पूरा हुआ है। जगद्गुरु रामानंदाचार्य द्वार का निर्माण राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के समय ही हो गया था, हालांकि इसके प्रवेश मंडप का कार्य अभी बाकी है। आद्य शंकराचार्य द्वार का निर्माण भी ध्वजारोहण समारोह से कुछ दिन पहले ही संपन्न हुआ था।
सूत्रों के अनुसार, जगद्गुरु मध्वाचार्य द्वार का निर्माण कार्य वीवीआईपी गेट के निर्माण के कारण कुछ समय के लिए रोका गया था। अब जब आद्य शंकराचार्य द्वार का निर्माण पूरा हो गया है, तो ट्रस्ट ने जगद्गुरु मध्वाचार्य द्वार को भी भव्य रूप से बनवाने का फैसला किया है। इस नए निर्माण के बाद, विशिष्ट अतिथियों को मुख्य वीवीआईपी द्वार से प्रवेश दिया जाएगा, जिससे दर्शन प्रक्रिया और अधिक सुव्यवस्थित हो सकेगी।
कार्यदायी संस्था के अधिकारियों ने बताया कि सभी प्रवेश द्वारों के निर्माण के लिए एक साथ टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई है, जिस पर लगभग 21 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। जगद्गुरु मध्वाचार्य द्वार की ऊंचाई पांच मीटर होगी और इसमें चार गेट होंगे, जिनमें दो छोटे गेट श्रद्धालुओं या कर्मियों के आवागमन के लिए होंगे। इस बदलाव से परिसर में सुरक्षा और व्यवस्था दोनों को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
