राजधानी को संवारने के नाम पर करोड़ों डूबे, विकास योजनाएं दम तोड़ गईं
पिछले दस वर्षों में रांची को एक आधुनिक राजधानी के रूप में विकसित करने की कई महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू तो हुईं, लेकिन बेहतर योजना, जमीन अधिग्रहण की समस्या और संचालन व्यवस्था के अभाव में दम तोड़ गईं। नतीजतन, करोड़ों रुपये की लागत से शुरू की गई परियोजनाएं अधूरी रह गईं और सरकारी धन की भारी बर्बादी हुई।
इन विफलताओं में मोरहाबादी मैदान में बनाया गया नाइट मार्केट, कांके में अधूरा पड़ा अर्बन हाट और चार स्मार्ट रोड परियोजनाओं का निर्माण शामिल है। इन परियोजनाओं को आनन-फानन में शुरू कर दिया गया, लेकिन जमीन से जुड़े विवादों, बेहतर योजना के अभाव और निर्मित संरचनाओं के संचालन की स्पष्ट नीति न होने के कारण वे कभी पूरी नहीं हो सकीं।
स्मार्ट रोड नंबर-1 के निर्माण के दौरान, एयरपोर्ट से बिरसा चौक तक सड़क के एक ओर ही जमीन मिल पाई थी, क्योंकि सेना के अधिकारियों ने दूसरी ओर जमीन देने से इनकार कर दिया था। इसी तरह, स्मार्ट रोड नंबर-2 के निर्माण में भी रेलवे की ओर से बाधा उत्पन्न हुई। अन्य स्मार्ट रोड परियोजनाओं में भी डक्ट और स्टार्म वाटर ड्रेन के निर्माण के लिए खोदाई तो की गई, लेकिन कई महीनों तक काम बंद रहा और आखिरकार गड्ढों को बालू से भरवाकर छोड़ दिया गया।
अब एक बार फिर राजधानी को बेहतर बनाने की दिशा में एक नई योजना पर काम शुरू होने वाला है। बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से हिनू चौक होते हुए बिरसा चौक तक सिक्स लेन सड़क का निर्माण कराया जाएगा। इस परियोजना में सड़कों का चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण शामिल है। हालांकि, पिछली असफलताओं को देखते हुए, यह उम्मीद की जा रही है कि इस बार योजना को जमीन पर उतारने से पहले सभी बाधाओं का समाधान किया जाएगा ताकि करोड़ों की लागत वाली यह परियोजना सफल हो सके और राजधानी का विकास सही मायने में हो।
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