राजौरी में शिक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई, हाजिरी लगाकर गायब रहने वाले पांच शिक्षक निलंबित
राजौरी जिले में सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और अनुशासन को बनाए रखने के लिए शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाए हैं। मुख्य शिक्षा अधिकारी मुहम्मद हाफिज के नेतृत्व में कई सरकारी स्कूलों में अचानक निरीक्षण किया गया, जिसमें गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि कई शिक्षक स्कूल में अपनी हाजिरी दर्ज कराने के बाद नदारद हो जाते थे और अपने निजी काम निपटाते थे। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए, पांच शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
प्राथमिक विद्यालय धनोर जरलां में औचक निरीक्षण के दौरान दो शिक्षिकाएं, नाजिया तबस्सुम और जोहरा जबीं, ड्यूटी पर अनुपस्थित पाई गईं। उन्हें निलंबित कर दिया गया और मिडिल स्कूल टनोनी व मिडिल स्कूल ऐत्ती राजौरी में अटैच किया गया है। इसी प्रकार, मिडिल स्कूल धनोर गोरसियां में तीन अन्य शिक्षक, नाजिया कौसर, जुबैर अहमद और सुकेश कुमार, भी बिना अनुमति के अनुपस्थित मिले। इन तीनों को भी निलंबित कर दिया गया है और क्रमशः मिडिल स्कूल मेहरा राजौरी और प्राथमिक विद्यालय हिल कोटलान पीढ़ी में अटैच किया गया है। सूत्रों के अनुसार, इन स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण बच्चों को पढ़ाने का कार्य आया और कुक द्वारा किया जा रहा था, जो शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मुख्य शिक्षा अधिकारी ने इस मामले में निगरानी में लापरवाही के लिए मिडिल स्कूल धनोर गोरसियां की प्रभारी प्रधानाध्यापिका खालिदा परवीन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उन्हें दो दिनों के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया गया है, अन्यथा सिविल सेवा नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। इसके अलावा, मिडिल स्कूल खेवहरा के प्रधानाध्यापक मुहम्मद रियाज को भी उनके दायित्वों में ढिलाई बरतने के आरोप में जोनल एजुकेशन ऑफिस, खवास में अटैच किया गया है। उन्हें भी दो दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
यह कार्रवाई शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों में अनुशासनहीनता और अनियमितताओं को बर्दाश्त नहीं करने की नीति को दर्शाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और शिक्षक अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा से करें। इस तरह के औचक निरीक्षण भविष्य में भी जारी रहेंगे ताकि शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके।
