पुणे महानगरपालिका चुनाव: MVA में दरार, कांग्रेस-उद्धव सेना का गठबंधन, NCP के दोनों गुट अलग-अलग लड़ेंगे ‘Pune politics’ की जंग
पुणे महानगरपालिका (PMC) चुनाव से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन में दरार के बाद, अब कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) ने मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। यह कदम तब उठाया गया जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों – अजित पवार और शरद पवार गुट – ने पुणे में अलग-अलग चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। इस घटनाक्रम ने स्थानीय ‘Pune politics’ के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस और शिवसेना (UBT) ने तेजी से गठबंधन की दिशा में कदम बढ़ाया है। कांग्रेस ने औपचारिक रूप से उद्धव सेना को संयुक्त रूप से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव भेजा है। दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर शुक्रवार को महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। पुणे के 41 चुनावी वार्डों और 165 कॉरपोरेटर सीटों पर उम्मीदवारों के चयन को लेकर चर्चा होगी।
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अजित पवार के गुट के साथ किसी भी तरह के गठबंधन के खिलाफ हैं। पार्टी का मानना है कि ऐसा गठबंधन उसके दीर्घकालिक हितों को नुकसान पहुंचाएगा। कांग्रेस 2017 के PMC चुनावों के नतीजों को दोहराना नहीं चाहती, जब उसने अकेले चुनाव लड़ा था और 85 सीटों पर उम्मीदवार उतारने के बावजूद केवल 10 सीटें जीती थीं। इस बार, पार्टी भाजपा के खिलाफ वोटों के बंटवारे को रोकने के लिए व्यापक गठबंधन की रणनीति अपना रही है।
इस बीच, उद्धव सेना ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के साथ भी गठबंधन की संभावना तलाशी है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और MNS मिलकर एक व्यापक विपक्षी मोर्चा बना सकते हैं। हालांकि, विपक्ष के लिए चुनौतियां भी कम नहीं हैं। हाल ही में, भाजपा ने मुंबई में शरद पवार गुट, कांग्रेस और शिवसेना (UBT) के 22 पूर्व कॉरपोरेटरों को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया है, जिससे चुनाव से पहले विपक्ष को झटका लगा है।
