दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शनों के डीनोटिफाइड होने से जनता की आवाज पर पहरा | delhi news
दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के केंद्र रहे ऐतिहासिक जंतर-मंतर को लेकर प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव किया गया है। अब इस इलाके को प्रदर्शनों के लिए ‘डीनोटिफाइड’ कर दिया गया है, जिसका सीधा मतलब है कि पिछले तीस सालों से सत्ता के गलियारों के करीब गूंजने वाली आवाजें अब शहर के दूरदराज के इलाकों में सिमट कर रह जाएंगी। सरकार के इस कदम से आम नागरिकों और विभिन्न संगठनों के सामने अपनी नाराजगी जाहिर करने का संकट खड़ा हो गया है।
नए नियमों के तहत अब प्रदर्शनकारियों को बुराड़ी, रामलीला मैदान या शाहदरा के सीबीडी पार्क जैसे बाहरी स्थानों का रुख करना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता के करीब होने वाले विरोध प्रदर्शनों से सरकारों पर सीधा दबाव बनता था, जिसे कम करने के लिए असंतोष की आवाजों को धीरे-धीरे शहर की परिधि की ओर धकेला जा रहा है। नब्बे के दशक में बोट क्लब से शुरू हुआ यह सफर जंतर-मंतर होते हुए अब शहर के अंतिम छोर तक पहुंच गया है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का अधिकार है कि वह अपनी समस्याओं और मांगों को सीधे हुक्मरानों तक पहुंचाए। सेंट्रल दिल्ली से विरोध प्रदर्शनों को दूर करने से न केवल मीडिया कवरेज और सोशल मीडिया के लिए जरूरी विजुअल स्पेस प्रभावित होगा, बल्कि आम जनता और सरकार के बीच की दूरी भी बढ़ेगी। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या नागरिक समाज इस प्रशासनिक फैसले के खिलाफ कोई बड़ा कानूनी या सामाजिक रुख अपनाता है।
