जियो टैगिंग का विरोध: लखनऊ में व्यापारियों का प्रदर्शन, बाजार बंद
लखनऊ में जियो टैगिंग की अव्यवहारिक व्यवस्था के खिलाफ व्यापारियों का आक्रोश अब सड़कों पर दिखने लगा है। लखनऊ किराना कमेटी, लखनऊ गल्ला खाद्य व्यापार मंडल, भारतीय कृषि उत्पाद उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के संयुक्त तत्वावधान में सुभाष मार्ग स्थित राम मंदिर के पास व्यापारियों ने बाजार पूरी तरह बंद रखकर धरना प्रदर्शन किया। नाराज व्यापारियों ने सरकार और मंडी परिषद के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए जियो टैगिंग की व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की पुरजोर मांग उठाई।
लखनऊ व्यापार मंडल के अध्यक्ष अमरनाथ मिश्र ने चेतावनी दी कि सरकार व्यापारियों की सहनशीलता की परीक्षा न ले। उन्होंने कहा कि व्यापार को सरल बनाने के बजाय नए-नए नियम थोपकर लालफीताशाही और विभागीय उत्पीड़न को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे व्यापारी वर्ग का जीना दुश्वार हो गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि यह व्यवस्था वापस नहीं ली गई तो पूरे प्रदेश में बाजारों को अनिश्चितकालीन बंद कर चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा, जिसमें कृषि भवन से लेकर विधानसभा तक का घेराव शामिल होगा।
भारतीय कृषि उत्पाद उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र ने बताया कि राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद द्वारा प्रदेश में कृषि उपज के व्यापार के लिए ऑनलाइन व्यवस्था पहले से ही प्रभावी रूप से संचालित है। ऐसी स्थिति में 01 जुलाई 2026 से जियोटैग ऐप के माध्यम से वाहन लोडिंग एवं अनलोडिंग के समय वाहन टैगिंग की एक अतिरिक्त समानांतर ऑनलाइन व्यवस्था लागू कर दी गई है। यह व्यवस्था ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की भावना के विपरीत है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित अधिकांश मंडियों के व्यापारी तकनीकी संसाधनों एवं डिजिटल दक्षता के अभाव में इस व्यवस्था का सुचारु रूप से पालन नहीं कर पा रहे हैं, जिससे व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं और किसानों को भी अपनी उपज के विपणन में अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस दौरान व्यापारियों ने खून से हस्ताक्षर किए ज्ञापन मुख्यमंत्री के नाम संबोधित एसीपी चौक को सौंपा गया।
लखनऊ गल्ला खाद्य व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार अग्रवाल ने बताया कि नो-एंट्री के कारण माल की लोडिंग-अनलोडिंग देर रात या अलसुबह होती है। एक ही वाहन में अलग-अलग जिंसों के गेट पास होते हैं और माल ट्रांसफर होने पर बार-बार जियो टैगिंग करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। ग्रामीण मंडियों में व्यापारियों और वाहन चालकों के पास आधुनिक स्मार्टफोन तक नहीं होते, ऐसे में तकनीकी चूक पर व्यापारियों को दोषी ठहराना सरासर गलत है।
