अफसरों की लापरवाही से खजूरी के लोग नरक में, नाले का पानी सड़कों पर
देश की राजधानी दिल्ली के पूर्वी क्षेत्र खजूरी में रहने वाले स्थानीय लोगों का जीवन नारकीय बन गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की एक चूक और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग की सुस्ती के कारण यहां के बाशिंदे पिछले एक साल से नाले के गंदे पानी के बीच रहने को मजबूर हैं। सड़कों और गलियों में जमा पानी ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।
खुला नाला बनाने के उद्देश्य से एनएचएआई ने सिंचाई विभाग को 19.75 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की थी। फंड प्राप्त हुए सात महीने बीत चुके हैं, लेकिन सिंचाई विभाग अभी तक नाले के निर्माण कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका है। इस देरी के कारण स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। वे अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठाते हुए पूछ रहे हैं कि क्या वे (अधिकारी) एक दिन भी ऐसी बदतर स्थिति में गुजार सकते हैं। यदि नहीं, तो वे कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि यहां के लोग इस गंदे पानी और गंदगी के बीच अपना जीवन व्यतीत करें।
खजूरी खास थाने के आसपास की सड़कों से पानी कुछ हद तक कम हुआ है, लेकिन पूरी तरह से जलभराव की समस्या समाप्त नहीं हुई है। सड़कों पर कीचड़ जमा है, जिससे आवागमन दूभर हो गया है। श्रीराम कॉलोनी की गलियों में तो स्थिति और भी खराब है, जहाँ पानी लबालब भरा हुआ है। जब सिंचाई विभाग को धन प्राप्त हुआ था, तब स्थानीय लोगों को उम्मीद जगी थी कि जल्द ही नाला निर्माण का कार्य शुरू होगा और उनकी मुसीबतें कम होंगी। लेकिन उनकी उम्मीदें अब निराशा में बदल गई हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि नाले के पानी की निकासी की व्यवस्था अभी तक सुचारू नहीं हो पाई है। सड़कों और गलियों में पहले की तरह ही पानी जमा है। जब वे अधिकारियों से संपर्क करते हैं, तो उन्हें कोई न कोई नया बहाना सुनने को मिलता है। अधिकारी अक्सर टेंडर जल्द निकलने का आश्वासन देते हैं, लेकिन फिर किसी न किसी तकनीकी समस्या का हवाला देकर काम को टाल देते हैं।
इस मामले में उत्तर पूर्वी दिल्ली के सांसद के कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, एनएचएआई ने बिजली की लाइन हटाने के लिए सिंचाई विभाग को पांच करोड़ रुपये अतिरिक्त भी दिए हैं। अब यह पूरी तरह से सिंचाई विभाग पर निर्भर करता है कि वह कितनी जल्दी इस महत्वपूर्ण कार्य को पूरा कर पाता है। स्थानीय लोग अब सरकार और संबंधित विभागों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं ताकि उन्हें इस बदहाल स्थिति से निजात मिल सके।
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