फर्जी प्रमाण पत्र से एमडी सीट पर दाखिला: पूर्व ईडी और बेटे पर FIR दर्ज नहीं
गोरखपुर एम्स के पूर्व कार्यकारी निदेशक (ईडी) डॉ. जीके पाल और उनके बेटे डॉ. ओरोप्रकाश पाल के खिलाफ एमडी की सीट पर फर्जी ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाण पत्र के आधार पर दाखिला दिलाने के गंभीर आरोपों में एफआईआर दर्ज करने के कोर्ट के आदेश के बावजूद, एम्स पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट त्विषि श्रीवास्तव ने सात नवंबर को इस मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।
सूत्रों के अनुसार, डॉ. पाल पर आरोप है कि उन्होंने अपने बेटे डॉ. ओरोप्रकाश पाल के लिए ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर का एक फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया। इसी प्रमाण पत्र के आधार पर उनके बेटे का गोरखपुर एम्स के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में एमडी सीट पर प्रवेश दिलाया गया। शिकायतकर्ता, कैंट थाना क्षेत्र के दिव्यनगर निवासी आशुतोष कुमार मिश्र ने अपनी याचिका में बताया है कि डॉ. जीके पाल और उनकी पत्नी पार्वती पाल की वार्षिक आय 80 लाख रुपये से अधिक थी, जिसके बावजूद उनके बेटे को ओबीसी कोटे का लाभ दिया गया, जो नियमों के विरुद्ध है।
इस मामले के स्वास्थ्य मंत्रालय तक पहुंचने के बाद डॉ. पाल को पहले एम्स गोरखपुर से हटाया गया और बाद में उन्हें एम्स पटना से भी निष्कासित कर दिया गया। वर्तमान में वह जिपमेर पुड्डुचेरी में कार्यरत हैं।
एम्स थाने के थानाध्यक्ष संजय मिश्र ने इस संबंध में कहा है कि कोर्ट का आदेश प्राप्त हो गया है, लेकिन अभी एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है। पुलिस की इस देरी पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या कार्रवाई के लिए और इंतजार करना होगा। यह मामला शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है, जहां प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा नियमों का उल्लंघन कर पदों का दुरुपयोग किया जा सकता है।
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