फर्जी हस्ताक्षर-मुहर से भैंस लोन घोटाला: लाखों का गबन, फाइलों की जांच शुरू
बागपत जिले में भैंसों पर लोन बांटने के नाम पर एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। सरूरपुरकलां के पशु अस्पताल के प्रभारी चिकित्सक के फर्जी हस्ताक्षर और उनकी नकली मुहर का इस्तेमाल कर भैंसों के स्वास्थ्य प्रमाण पत्र तैयार किए गए। इन जाली दस्तावेजों के आधार पर एक बैंक से लाखों रुपये का भैंस लोन वितरित कर दिया गया, जिससे हड़कंप मच गया है।
मामला तब तूल पकड़ गया जब स्थानीय निवासी संजीव कुमार ने इस धोखाधड़ी की शिकायत उच्चाधिकारियों से की। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे जिलों के पशु अस्पतालों के नाम से जारी किए गए प्रमाण पत्रों पर बागपत की एक बैंक शाखा से लोन जारी हुआ है। यह भी आशंका जताई गई है कि इस गोरखधंधे के पीछे एक पूरा रैकेट सक्रिय है, जो लोगों को लोन दिलाने के नाम पर पैसे वसूलता है।
इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए, मुख्य विकास अधिकारी नीरज कुमार श्रीवास्तव ने जिला विकास अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी और केनरा बैंक के जिला अग्रणी प्रबंधक की एक कमेटी गठित कर मामले की गहनता से जांच के निर्देश दिए हैं। सोमवार को अधिकारियों की टीम ने संबंधित बैंक शाखा में पहुंचकर 12 संदिग्ध फाइलों की पड़ताल की। इनमें से सात फाइलों पर पहले ही लोन वितरित हो चुका था, जबकि पांच फाइलों को मामला सामने आने के बाद रोक दिया गया था।
अधिकारियों ने बैंक प्रबंधक और संबंधित पशु चिकित्सक से अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए कहा है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अरविंद कुमार ने पुष्टि की है कि मामले की जांच चल रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। इस मामले के सुर्खियों में आने के बाद, सचिव मुख्यमंत्री ने भी इस पर संज्ञान लेते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। दैनिक जागरण में इस खबर के प्रकाशित होने के बाद, यह मामला और भी गंभीर हो गया है। इस तरह के फर्जीवाड़े ने न केवल सरकारी योजनाओं की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि वित्तीय संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी प्रश्नचिन्ह लगाया है। जांच पूरी होने के बाद ही घोटाले की पूरी भयावहता का पता चल पाएगा।
