पुतिन भारत में: रक्षा, व्यापार और शांति वार्ता पर},{28 घंटे का गहन मंथन
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपनी दो दिवसीय महत्वपूर्ण भारत यात्रा पर आज नई दिल्ली पहुंच रहे हैं। यह यात्रा कई मायनों में अहम मानी जा रही है, क्योंकि इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, व्यापारिक संबंधों को बाहरी दबाव से बचाना और यूक्रेन संकट जैसे ज्वलंत मुद्दों पर गहन चर्चा होने की उम्मीद है। राष्ट्रपति पुतिन भारत में लगभग 28 घंटे का समय व्यतीत करेंगे, जो द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम राष्ट्रपति पुतिन के लिए एक विशेष रात्रिभोज का आयोजन करेंगे। यह मुलाकात जुलाई 2024 में मास्को के बाहर राष्ट्रपति पुतिन के निवास स्थान पर हुई चार घंटे की एकांत वार्ता की याद दिलाती है, जहाँ दोनों नेताओं ने खुलकर विचारों का आदान-प्रदान किया था। इस बार भी नई दिल्ली में इसी तरह के सौहार्दपूर्ण और गहन वार्ता का माहौल बनने की उम्मीद है।
यात्रा के दूसरे दिन, शुक्रवार को, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित होने वाले इंडिया-रूस बिजनेस फोरम में हिस्सा लेंगे। दोनों नेता इस मंच को संबोधित भी करेंगे, जिससे दोनों देशों के व्यापारियों और उद्योगपतियों को एक-दूसरे के साथ जुड़ने और सहयोग के नए अवसर तलाशने का मौका मिलेगा। इस समिट मीटिंग का मुख्य एजेंडा रक्षा संबंधों को और मजबूत करना, भारत-रूस व्यापार को बाहरी दबावों से सुरक्षित रखना और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (एसएमआर) के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं को खोजना रहने की उम्मीद है।
यह यात्रा ऐसे नाजुक समय पर हो रही है जब अमेरिका यूक्रेन में युद्ध को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। हाल ही में, अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया था कि पुतिन भी युद्ध को समाप्त करने के इच्छुक हैं। शुक्रवार को 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन से पहले पुतिन का औपचारिक स्वागत किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले कुछ सामानों पर भारी टैरिफ लगाया है, जिसमें रूसी कच्चा तेल खरीदने पर 25 प्रतिशत की लेवी भी शामिल है। इस अमेरिकी फैसले के कारण भारत-अमेरिका संबंधों में पिछले दो दशकों में सबसे अधिक तनाव देखा जा रहा है। संभावना है कि इस शिखर सम्मेलन में भारत के रूस से कच्चे तेल की खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंधों के संभावित असर पर भी चर्चा होगी।
सूत्रों का यह भी कहना है कि नई दिल्ली में होने वाली इस शिखर बैठक में राष्ट्रपति पुतिन, प्रधानमंत्री मोदी को यूक्रेन विवाद को समाप्त करने के लिए अमेरिका द्वारा की जा रही नई कोशिशों के बारे में जानकारी दे सकते हैं। भारत हमेशा से ही बातचीत और कूटनीति को किसी भी संघर्ष को हल करने का एकमात्र प्रभावी तरीका बताता रहा है।
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