पुलिस की गलती से जेल पहुंचा निर्दोष, फोरेंसिक रिपोर्ट ने खोला सच
चंडीगढ़ में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पुलिस ने एक सामान्य मौत को गैर इरादतन हत्या का रूप देकर एक निर्दोष व्यक्ति को सलाखों के पीछे भेज दिया। यह घटना तब सामने आई जब फोरेंसिक जांच रिपोर्ट ने पुलिस की जांच पर सवालिया निशान लगा दिया।
मामला सेक्टर-36 का है, जहां एक बुजुर्ग महिला संतोष मित्तल की अचानक मौत हो गई। महिला के बेटे अजय मित्तल ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि उनके चाचा अशोक मित्तल ने उनकी मां के साथ झगड़ा और हाथापाई की, जिसके कारण उनकी हालत बिगड़ गई और बाद में उनकी मौत हो गई। बेटे की शिकायत के आधार पर, पुलिस ने अशोक मित्तल के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
हालांकि, इस घटना के चार महीने बाद, सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लैबोरेट्री (सीएफएसएल) की रिपोर्ट ने सच्चाई का पर्दाफाश किया। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि महिला की मौत किसी भी तरह की मारपीट या झगड़े का परिणाम नहीं थी, बल्कि यह एक ‘नेचुरल डेथ’ यानी प्राकृतिक मौत थी। महिला को पहले से दिल की बीमारी थी और उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी महिला के शरीर पर किसी बाहरी चोट के निशान नहीं पाए गए थे और मौत का कारण एक्यूट कोरोनरी इंसफिशिएंसी बताया गया था, जो कि एक पुरानी हृदय रोग की स्थिति है।
सीएफएसएल की रिपोर्ट सामने आने के बाद, जिला अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चार महीने से जेल में बंद अशोक मित्तल को जमानत दे दी। अशोक मित्तल के वकील ने इस बात पर जोर दिया कि उनके मुवक्किल को झूठे आरोप में फंसाया गया था और पुलिस के पास शिकायतकर्ता के बयान के अलावा कोई ठोस सबूत नहीं था। मामले में किसी चश्मदीद गवाह का भी अभाव था, जिससे पुलिस की जांच पर सवाल उठते हैं।
यह मामला पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है, जहाँ प्रारंभिक जांच में तथ्यों को नजरअंदाज कर एक व्यक्ति को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित किया गया। फोरेंसिक विज्ञान की भूमिका ने अंततः न्याय दिलाने में मदद की।
