प्रशांत किशोर की जन सुराज को झटका, प्रत्याशी को नोटा से भी कम वोट मिले
बिहार विधानसभा चुनाव के हालिया नतीजों ने राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज के लिए चिंताजनक तस्वीर पेश की है। खगड़िया जिले के परबत्ता विधानसभा क्षेत्र में जन सुराज के उम्मीदवार को ‘इनमें से कोई नहीं’ (NOTA) विकल्प से भी कम मत मिले, जो पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इस परिणाम ने जन सुराज के चुनावी भविष्य और उसकी मौजूदा रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 14 नवंबर को संपन्न हुई मतगणना में प्रत्याशियों के साथ-साथ नोटा को भी मतदाताओं का अच्छा समर्थन मिला। खगड़िया जिले की सभी चार विधानसभा सीटों पर कुल 20,138 मतदाताओं ने नोटा में अपना मत डाला, जो कई प्रत्याशियों के कुल मतों से भी अधिक था।
नोटा के मतों के विश्लेषण से पता चलता है कि बेलदौर विधानसभा में सर्वाधिक 7,980 मत नोटा को मिले। वहीं, अलौली सुरक्षित विधानसभा सीट पर 3,953 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया। इस सीट पर मैदान में उतरे पांच प्रत्याशियों में से चार को नोटा से अधिक वोट मिले, जबकि एक प्रत्याशी नोटा से भी कम मत हासिल कर सका।
खगड़िया विधानसभा सीट पर भी नोटा को 3,662 मत प्राप्त हुए। यहां कुल 10 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे थे, जिनमें से छह प्रत्याशियों को नोटा से भी कम मत मिले, जबकि चार प्रत्याशी ही नोटा से अधिक मत प्राप्त कर पाए।
परबत्ता विधानसभा सीट पर नोटा को 4,543 मत मिले। इस सीट पर पांच प्रत्याशी मैदान में थे। महागठबंधन और एनडीए के प्रत्याशियों को छोड़कर शेष तीन प्रत्याशियों को नोटा से भी कम वोट मिले। इनमें जन सुराज और बसपा के प्रत्याशी भी शामिल थे, जो मतदाताओं को नोटा से अधिक आकर्षित नहीं कर पाए।
जन सुराज के इस निराशाजनक प्रदर्शन ने प्रशांत किशोर के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। यह परिणाम दर्शाता है कि पार्टी को अभी भी मतदाताओं के बीच अपनी पैठ बनाने और विश्वसनीय विकल्प के रूप में स्थापित होने के लिए लंबा रास्ता तय करना है। इस बड़े झटके के बाद पार्टी को अपनी जमीनी रणनीति और जनता से जुड़ने के तरीकों पर गंभीरता से पुनर्विचार करना होगा।
