पंजाब सरकार का यू-टर्न: श्री आनंदपुर साहिब को जिला बनाने की योजना रद्द
पंजाब सरकार श्री गुरु तेग बहादुर साहिब के 350वें बलिदान दिवस के अवसर पर श्री आनंदपुर साहिब को एक नया जिला बनाने की अपनी महत्वाकांक्षी योजना से पीछे हट गई है। सूत्रों के अनुसार, भारी वित्तीय बोझ और विभिन्न वर्गों के विरोध को देखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है। अब राज्य सरकार रूपनगर जिले का नाम बदलकर श्री गुरु तेग बहादुर नगर करने पर विचार कर रही है। इस प्रस्ताव पर आगामी 24 नवंबर को होने वाले विधानसभा सत्र के दौरान चर्चा की जाएगी।
एक नया जिला बनाने की योजना में लगभग 560 करोड़ रुपये के भारी निवेश की आवश्यकता थी, जिसमें नए प्रशासनिक भवनों, आवासों और अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण शामिल था। इसके अतिरिक्त, नए जिले के लिए अतिरिक्त अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन मद में हर साल 28 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता। इस आर्थिक भार के कारण सरकार ने अपनी योजना पर पुनर्विचार किया है।
सूत्रों का कहना है कि रूपनगर का नाम बदलकर श्री गुरु तेग बहादुर नगर करने से न तो किसी वर्ग की भावनाएं आहत होंगी और न ही किसी विधानसभा क्षेत्र के गांवों को दूसरे जिले में स्थानांतरित करने की आवश्यकता पड़ेगी। यह समाधान सरकार के लिए वित्तीय रूप से भी अधिक व्यवहार्य है। इससे पहले भी ऐसे उदाहरण देखे गए हैं जहाँ जिले का नाम और मुख्य शहर का नाम भिन्न रहा है, जैसे शहीद भगत सिंह नगर (नवांशहर) और साहिबजादा अजीत सिंह नगर (मोहाली)।
नई जिला बनाने की कवायद को लेकर सरकार को अपनी ही पार्टी के भीतर और बाहर दोनों तरफ से विरोध का सामना करना पड़ा था। गढ़शंकर, रूपनगर और खरड़ जैसे क्षेत्रों में इस योजना के खिलाफ काफी नाराजगी देखी गई थी। इन विरोधों और आर्थिक चिंताओं ने सरकार को वैकल्पिक समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया।
श्री गुरु तेग बहादुर साहिब के 350वें बलिदान दिवस के उपलक्ष्य में राज्य सरकार बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित कर रही है। विधानसभा सत्र के दौरान, नियमित कामकाज के बजाय, गुरु तेग बहादुर साहिब के जीवन और बलिदान पर चर्चा की जाएगी। इसी सत्र में, सरकार द्वारा उनके नाम पर की जा रही पहलों के संबंध में प्रस्ताव भी रखे जा सकते हैं, जिसमें जिले के नामकरण का प्रस्ताव भी शामिल हो सकता है।
इस बीच, सरकार द्वारा आयोजित सर्व धर्म सम्मेलन के लिए विभिन्न धर्मों की प्रमुख हस्तियां श्री आनंदपुर साहिब पहुंच रही हैं। इनमें आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर, जैन साधु, मुस्लिम प्रतिनिधि, न्यायाधीश और तमिलनाडु से एक सांसद और राज्य सरकार के मंत्री शामिल हैं। यह कार्यक्रम गुरु तेग बहादुर के बलिदान को श्रद्धांजलि देने और समाज में सद्भाव को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों का एक हिस्सा है।
