पंजाब रोडवेज की आठ दिसंबर से हड़ताल, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की मांग
पंजाब रोडवेज पनबस/पीआरटीसी कंट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया है कि सरकार उनकी मांगों को लगातार अनसुना कर रही है, जिसके चलते अब उन्होंने आठ दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। यूनियन का कहना है कि कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने के मुद्दे पर कई बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।nnnnयूनियन के प्रदेश प्रधान रेशम सिंह गिल ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार को सत्ता में आए लगभग चार साल होने वाले हैं, लेकिन ट्रांसपोर्ट विभाग में एक भी कच्चे कर्मचारी को पक्का नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि यूनियन ने संघर्ष के दौरान लगभग 50 से 60 बैठकों में हिस्सा लिया है, जिनमें दो बैठकें स्वयं मुख्यमंत्री के साथ भी हुईं। इसके बावजूद, सरकार ने बार-बार आश्वासन देने के बाद भी एक भी मांग पूरी नहीं की है। इसी हताशा के चलते आठ दिसंबर से हड़ताल का निर्णय लिया गया है।nnnnयूनियन नेताओं ने सरकार पर परिवहन विभाग को निजी हाथों में सौंपने का गंभीर आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि ‘किलोमीटर स्कीम’ के नाम पर निजी बसों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे सरकारी ट्रांसपोर्ट व्यवस्था कमजोर हो रही है। यूनियन के एक नेता हरकेश कुमार विक्की ने कहा कि सरकार नौकरियां देने की बजाय निजीकरण को बढ़ावा दे रही है, जिससे प्रदेश में बेरोजगारी बढ़ रही है और युवा निराशा व नशे की ओर धकेले जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब विभाग खुद बसें खरीद सकता है, तो निजी मालिकों की बसों पर निर्भरता समझ से परे है।nnnnमांगें पूरी न होने की स्थिति में आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी गई है। इसके तहत, दो दिसंबर को सुबह 11 बजे राज्यव्यापी गेट रैलियां की जाएंगी। यदि पीआरटीसी प्रबंधन ने टेंडर खोला तो तुरंत बस सेवाएं ठप कर दी जाएंगी। इसके बाद आठ, नौ और दस दिसंबर को पूर्ण हड़ताल की जाएगी। यूनियन नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे मुख्यमंत्री, ट्रांसपोर्ट मंत्री और पीआरटीसी चेयरमैन के आवास पर पक्का धरना भी देंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने कच्चे कर्मचारियों को पक्का नहीं किया और किलोमीटर स्कीम वापस नहीं ली, तो वे 52 सवारियों के नियम को लागू करते हुए आंदोलन को और कठोर बनाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।”
सरकार पर होगी।
