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पलवल में स्कूल वाहनों पर कसी नकेल, सुरक्षित वाहन नीति के तहत जांच तेज

By Nov 24, 2025

बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करने के अपने संकल्प को दोहराते हुए, पलवल जिला पुलिस ने ‘स्कूल सुरक्षित वाहन नीति’ के तहत एक विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत, यातायात पुलिस, शिक्षा विभाग और आरटीए विभाग के संयुक्त तत्वावधान में जिले के विभिन्न स्कूलों में अचानक छापेमारी कर स्कूल बसों और वैनों की गहन जांच की गई। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्कूल वाहन बच्चों को सुरक्षित रूप से उनके गंतव्य तक पहुंचा सकें।

जांच के दौरान कई स्कूली वाहनों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। कुछ बसों में फर्स्ट-एड बॉक्स गायब मिले, जबकि कुछ में फायर एक्सटिंग्विशर या तो खराब थे या उनकी एक्सपायरी डेट निकल चुकी थी। इसके अतिरिक्त, कई चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस और उनके पुलिस वेरिफिकेशन भी अपडेट नहीं पाए गए। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने इन कमियों को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए। स्कूल प्रबंधन को स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी मानकों को पूरा नहीं किया गया, तो भारी जुर्माना और वाहन जब्ती जैसी कठोर कार्रवाई की जाएगी।

जिला पुलिस अधीक्षक ने इस संबंध में कहा कि बच्चों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और स्कूल सुरक्षित वाहन नीति का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। उन्होंने जोर दिया कि जो भी स्कूल संचालक या चालक इस मामले में लापरवाही बरतेगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई अवश्यंभावी होगी। जांच के दौरान मुख्य रूप से वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट, परमिट, बीमा, प्रदूषण सर्टिफिकेट, चालक के वैध ड्राइविंग लाइसेंस और पुलिस वेरिफिकेशन, परिचालक की नियुक्ति और प्रशिक्षण, फर्स्ट-एड किट की उपलब्धता, फायर एक्सटिंग्विशर की कार्यक्षमता, और आपातकालीन निकास द्वार जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं की पड़ताल की जा रही है।

पुलिस प्रशासन ने सभी निजी और सरकारी स्कूलों को एक सप्ताह का अल्टीमेटम जारी किया है। इस अवधि में सभी स्कूल वाहनों को ‘स्कूल सुरक्षित वाहन नीति’ के अनुरूप पूर्णतः तैयार करना होगा। इसके बाद, एक बार फिर से सघन जांच अभियान चलाया जाएगा और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर सीधे तौर पर चालान काटा जाएगा और वाहन को जब्त किया जाएगा। इसके साथ ही, पुलिस ने अभिभावकों से भी एक महत्वपूर्ण अपील की है। अभिभावकों से आग्रह किया गया है कि वे अपने बच्चों द्वारा उपयोग की जाने वाली स्कूल बसों की नियमित रूप से जांच करें और यदि उन्हें किसी भी प्रकार की कमी या अनियमितता दिखाई दे, तो तत्काल इसकी सूचना पुलिस या शिक्षा विभाग को दें, ताकि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

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