उपेंद्र कुशवाहा का मास्टरस्ट्रोक: बेटे दीपक प्रकाश बने मंत्री, सदन की सदस्यता जल्द
बिहार की नवगठित सरकार में राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने अपने पुत्र दीपक प्रकाश को मंत्री बनवाकर एक बड़ी राजनीतिक चाल चली है। दीपक प्रकाश के मंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि उपेंद्र कुशवाहा ने अपने राजनीतिक दांव को सफल बनाया है। हालाँकि, यह स्थिति थोड़ी असामान्य है क्योंकि दीपक प्रकाश वर्तमान में बिहार विधानसभा या विधान परिषद किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं।
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम की जड़ें विधानसभा चुनाव के दौरान हुए सीट बंटवारे से जुड़ी हैं। बताया जा रहा है कि कुशवाहा की पार्टी को महुआ सीट आवंटित की गई थी, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया गया। इस बात से उपेंद्र कुशवाहा काफी नाराज थे और उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर भी की थी।
खबरों के मुताबिक, इस मामले में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हस्तक्षेप किया और उपेंद्र कुशवाहा से दिल्ली में मुलाकात भी की। इस मुलाकात के दौरान, कुशवाहा की पार्टी को विधान परिषद की एक सीट देने का प्रस्ताव दिया गया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। इसी वादे को आधार बनाकर कुशवाहा अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री पद दिलाने में सफल रहे।
शपथ ग्रहण से एक दिन पहले तक यह कयास लगाए जा रहे थे कि उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता, जो सासाराम से विधायक चुनी गई हैं, उन्हें मंत्री बनाया जा सकता है। लेकिन अंतिम समय में समीकरण बदल गए और दीपक प्रकाश को कैबिनेट में जगह मिली।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उपेंद्र कुशवाहा ने इस कदम से एक साथ कई लक्ष्यों को साधा है। एक ओर उन्होंने अपने बेटे को मंत्री पद दिलवाया, वहीं दूसरी ओर, उन्हें जल्द ही उच्च सदन (विधान परिषद) में भेजा जाएगा, जिससे वे छह महीने के भीतर सदस्यता की अनिवार्यता को भी पूरा कर लेंगे। यह राजनीतिक पैंतरा न केवल उनके बेटे के राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करता है, बल्कि पार्टी के प्रभाव को भी बनाए रखने में सहायक होगा।
