पैड के लालच में फंसे कोयला कारोबारी, ईडी की छापेमारी से निरसा में हड़कंप
धनबाद के निरसा क्षेत्र में अवैध कोयला कारोबार से जुड़ी एक बड़ी कार्रवाई में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के बाद कई कोयला कारोबारी भूमिगत हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, अधिक पैसे कमाने के लालच में कुछ कारोबारियों ने पश्चिम बंगाल में पैड (अवैध वसूली) के धंधे को अपनाया, जो अब उनकी मुसीबत का कारण बन गया है। ईडी की टीम इन कारोबारियों की तलाश में जुटी हुई है और उनके ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है।
निरसा क्षेत्र के तीन प्रमुख कोयला कारोबारी रमेश गोप, बिनोद महतो और अरविंद सिंह, जिनका कारोबार पहले झारखंड तक ही सीमित था, ने अवैध कमाई की चाहत में पश्चिम बंगाल में अपना पैर पसारा था। चिरकुंडा निवासी बिनोद महतो ने दुर्गापुर के एक चर्चित अवैध कोयला कारोबारी लोकेश सिंह के संपर्क में आकर पैड के कारोबार में कदम रखा।
यह पैड का खेल मुख्य रूप से झारखंड से पश्चिम बंगाल ले जाए जाने वाले कोयला लदे ट्रकों से जुड़ा था। झारखंड-पश्चिम बंगाल सीमा क्षेत्र के डिबूडीह चेकपोस्ट के पास कोयला लदे ट्रकों को रोककर पैड जारी किया जाता था। इस पैड के नाम पर अवैध कोयला लदे ट्रक से 25 से 30 हजार रुपये, हार्डकोक कोयला लदे ट्रक से 10 से 14 हजार रुपये और एक नंबर कोयला लदे ट्रक से 2500 रुपये तक की वसूली की जाती थी। यह पूरा रैकेट लोकेश सिंह के नियंत्रण में था, और बिनोद महतो को प्रति ट्रक पांच हजार रुपये कमीशन मिलता था। इस धंधे से बिनोद ने करोड़ों की कमाई की, हालांकि हाल ही में उसने यह काम छोड़ दिया था।
बिनोद के हटने के बाद, निरसा के रमेश गोप ने लोकेश सिंह के संरक्षण में पैड के इस धंधे की कमान संभाली और प्रतिमाह अच्छी खासी कमाई करने लगा। अब ईडी की कार्रवाई के बाद, ये तीनों कारोबारी जांच एजेंसियों से बचने के लिए अज्ञातवास में चले गए हैं। ईडी की टीम इन कारोबारियों के ठिकानों पर दबिश बनाए हुए है और उनसे जुड़े अन्य लोगों से भी पूछताछ कर रही है। इस कार्रवाई से कोयलांचल के अवैध कारोबारियों में खलबली मची हुई है।
