‘एक राष्ट्र एक सब्सक्रिप्शन’ से मजबूत होगा देश का भविष्य: कुलपति
दरभंगा में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में ‘एक राष्ट्र एक सब्सक्रिप्शन सदस्यता’ पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो संजय कुमार चौधरी ने कहा कि नेशनल फाउंडेशन विथ रिसर्च फाउंडेशन विथ लिब्रल एजुकेशन हमारा लक्ष्य है। पीएम उषा के अंतर्गत मेरू विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने से हमारे सामने बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी खड़ी है। हमें आईआईटी और आईआईएम की तर्ज पर स्वयं को विकसित करना होगा ताकि बदलते वैश्विक आवश्यकताओं के मापदंड पर खरा उतर सके। उन्नत शोध और स्वावलंबी सस्टेनेबल डेवलपमेंट के साथ विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास हमारी प्राथमिकता है।
वे यूजीसी इंफ्लिबनेट सेंटर एवं ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय कार्यशाला सह उपभोक्ता जागरुकता कार्यक्रम ‘ एक राष्ट्र एक सब्सक्रिप्शन सदस्यता’ ( ओनोस भारत) के आयोजन को संबोधित कर रहे थे। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति ने कहा कि भारत सरकार द्वारा संचालित ओनोस भारत वट वृक्ष समान है, जिसके नीचे गुणवत्तापूर्ण शिक्षण प्रणाली विकसित होगी। यह समय की मांग है कि शिक्षक टीचिंग – लर्निंग होराइजन में संलग्न हो शोधार्थियों का मार्गदर्शन करें।
कुलपति ने ई- रिसोर्सेज से लबरेज पुस्तकालय की बात रखी। उन्होंने पुस्तकालय को किसी विश्वविद्यालय व कालेज की हृदयस्थली माना। ऐसे में समृद्ध पुस्तकालय में इंफ्लिबनेट के महत्व और अनुप्रयोगों की विस्तार से चर्चा की। अपने संबोधन में कुलपति ने बताया कि ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में 75 प्रतिशत शोध कार्य ‘ शोध गंगा ‘ पर अपडेटेड हैं। थीसिस को शोधार्थियों की पहुंच तक लाना आवश्यक है ताकि उनके शोध का मार्ग प्रशस्त हो सके। ओनोस नीतिगत तरीके से राष्ट्र को सुदृढ़ बनाने में सहायक है।
कार्यशाला में उपस्थित अन्य विश्वविद्यालयों के प्रतिभागियों को कड़ी मेहनत और अनुशासनात्मक अधिगम की प्रक्रिया से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला में उच्च शिक्षा निदेशक प्रो एनके अग्रवाल और गांधीनगर, गुजरात इंफ्लिबनेट सेंटर के तकनीकी विशेषज्ञ डा. अभिषेक कुमार और दिनेश रंजन प्रधान की गरिमामयी उपस्थिति रही। बतौर मुख्य वक्ता प्रो एनके अग्रवाल ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा क्षेत्र में उन्नत और गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों का संरक्षण आवश्यक है।
