0

एंटीबायोटिक दवाओं का बढ़ता प्रतिरोध: भारत में महामारी का बढ़ता खतरा

By Nov 28, 2025

देश भर के अस्पतालों में एंटीबायोटिक दवाओं का बेअसर होना एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है, जिससे संभावित महामारी का खतरा मंडराने लगा है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट ने इस स्थिति की ओर इशारा करते हुए कहा है कि पिछले कुछ वर्षों में एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी बैक्टीरिया के मामलों में 91 प्रतिशत तक की चिंताजनक वृद्धि दर्ज की गई है। इस अभूतपूर्व वृद्धि के कारण कई सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं अब निष्प्रभावी साबित हो रही हैं।

यह आठवीं वार्षिक रिपोर्ट जनवरी से दिसंबर 2024 के बीच देशभर के विभिन्न अस्पतालों से एकत्र किए गए 99,027 कल्चर-पॉजिटिव नमूनों के गहन विश्लेषण पर आधारित है। रिपोर्ट में बताया गया है कि सर्वाधिक संक्रमणों के लिए ‘ग्राम निगेटिव बैक्टीरिया (जीएनबी)’ जिम्मेदार हैं, जो दवाओं के प्रति तेजी से प्रतिरोध विकसित कर रहे हैं। ये बैक्टीरिया रक्त, मूत्र, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (सीएसएफ) और श्वसन तंत्र से जुड़े संक्रमणों का प्रमुख कारण हैं, जिससे इनका उपचार अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो गया है।

विशेष रूप से गहन चिकित्सा इकाइयों (आईसीयू) में स्थिति अधिक चिंताजनक है, जहां ‘एसिनेटोबैक्टर बाउमानी’ नामक बैक्टीरिया में 91 प्रतिशत तक एंटीबायोटिक प्रतिरोध पाया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) भी इस बैक्टीरिया को एक गंभीर प्राथमिक रोगजनक के रूप में सूचीबद्ध करता है। इसके अलावा, टाइफाइड बुखार के मुख्य कारक ‘साल्मोनेला टाइफी’ में फ्लूओरोक्विनोलोन वर्ग की दवाओं के प्रति 95 प्रतिशत तक प्रतिरोध देखा गया है। हालांकि, यह सेफ्ट्रिएक्सोन, सेफिक्साइम, ट्राइमेथोप्रिम-सल्फामेथाक्साजोल और एजिथ्रोमाइसिन जैसी अन्य दवाओं के प्रति संवेदनशील है, जो इस बात का संकेत है कि फ्लूओरोक्विनोलोन अब टाइफाइड के उपचार के लिए प्रभावी विकल्प नहीं रह गए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, बैक्टीरिया में एनडीएम, ओएक्सए-48 और टीईएम जैसे प्रतिरोधी जीनों का प्रसार ही इस बढ़ते प्रतिरोध का मुख्य कारण है। इन जीनों के फैलाव से नई और अत्यधिक प्रतिरोधी ‘सुपरबग’ प्रजातियों के जन्म लेने की आशंका है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर सकती हैं।

आईसीएमआर ने इस गंभीर संकट से निपटने के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया है। रिपोर्ट में संक्रमण नियंत्रण उपायों को मजबूत करने, सुपरबग्स के खिलाफ निगरानी बढ़ाने और एंटीबायोटिक दवाओं के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है। इसके अतिरिक्त, एक एकीकृत राष्ट्रीय एंटीबायोटिक नीति लागू करने और अस्पतालों में नियमित ऑडिट कराने का भी सुझाव दिया गया है। आईसीएमआर ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या राष्ट्रीय स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है, जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

About

Journalist covering latest updates.

साझा करें