लखनऊ में वंचित वर्गों के हक की हुंकार, भागीदारी के लिए एकजुट होगा मोर्चा: ‘social justice’
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में राष्ट्रीय पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक मोर्चा ने शोषित, पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के हक और भागीदारी को लेकर एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज के हाशिए पर खड़े वर्गों को संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से संगठित कर उन्हें उनके अधिकार दिलाना है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री उमेश कुमार भारती ने स्पष्ट किया कि संगठन वंचितों, शोषितों, पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों को एकजुट कर उनके सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास के साथ ही समुचित भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि यह मुहिम इन वर्गों को नई गति प्रदान करेगी।
मुख्य अतिथि श्री राजेन्द्र कुमार ने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने, लोगों में संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के कमजोर तबकों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया। केजीएमयू के प्रोफेसर डॉ. जितेन्द्र राव ने समाज के वास्तविक विकास के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की वकालत की। उन्होंने वंचित वर्गों के बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने, स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने की बात कही।
इस संगोष्ठी में आरक्षण, सामाजिक सुरक्षा और आबादी के अनुपात में सभी क्षेत्रों में उचित भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी विचार व्यक्त किए गए। सामाजिक भेदभाव, अन्याय और असमानता के खिलाफ सामाजिक सद्भाव व भाईचारा मजबूत करने की जरूरत जताई गई। संगठन को अनुशासित और मजबूत बनाने का आह्वान किया गया, साथ ही राष्ट्रहित, अनुशासन और एकता को सबसे महत्वपूर्ण बताया गया। जन जागरूकता अभियान चलाकर वंचित वर्गों को शिक्षा, रोजगार और विकास के अवसरों से जोड़ने पर जोर दिया गया।
सरकारी, संविदा, आउटसोर्सिंग तथा अन्य निजी कर्मचारियों की बुनियादी समस्याओं की पड़ताल कर उनके समाधान के लिए मोर्चा द्वारा उचित कदम उठाने की बात कही गई। दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक आयोगों के गठन तथा उनमें दर्ज शिकायतों के त्वरित निपटारे पर भी अपनी बात रखी गई। कार्यक्रम के दौरान नवनियुक्त पदाधिकारियों को संगठन के प्रति निष्ठा, संविधान के सम्मान और समाजहित में काम करने की शपथ दिलाई गई।
इस आयोजन का सार्वजनिक प्रभाव यह है कि यह वंचित और हाशिए पर खड़े समुदायों को संगठित कर उनके अधिकारों और प्रतिनिधित्व के लिए एक मंच प्रदान करेगा, जिससे सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा मिलेगा।
