अंग्रेजों के जमाने के स्कूल: जर्जर भवनों का होगा कायाकल्प, चमकेंगे नए रूप में
मेरठ जिले के 1068 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में से 131 जर्जर स्कूलों की सूची तैयार की गई है, जिन्हें अब नया रूप दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, इन जर्जर भवनों को नीलाम करके ध्वस्त किया जाएगा और फिर इनका नवीनीकरण किया जाएगा। इस योजना में अंग्रेजी शासनकाल में बने कुछ विद्यालय भी शामिल हैं, जिन्हें तोड़कर नए भवन बनाए जाएंगे।
प्रदेश सरकार के आदेश पर बेसिक शिक्षा विभाग ने 1935 से 2008 तक बने विद्यालयों में से जर्जर विद्यालयों को चिह्नित किया है। इन भवनों के ध्वस्तीकरण के लिए नीलामी की जाएगी। कुछ विद्यालय पूरी तरह तोड़े जाएंगे, जबकि कुछ में कुछ हिस्सों को तोड़कर नए सिरे से बनाया जाएगा। जिला प्रशासन जनप्रतिनिधियों, ग्राम प्रधानों और पार्षदों की मदद से इन विद्यालयों में सौंदर्यीकरण आदि काम कराएगा।
सीडीओ नुपूर गोयल के अनुसार, जर्जर भवनों को चिह्नित करने के लिए लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों की एक टीम को बेसिक शिक्षा विभाग की टीम के साथ लगाया गया था। टीम ने जांच के आधार पर भवनों की उम्र तय की और जिन भवनों की मियाद तीन से पांच साल शेष थी, उन्हें जर्जर घोषित किया गया।
जब इन विद्यालयों के भवनों को तोड़ा जाएगा, तो यहां पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई के लिए धर्मशाला, ग्राम पंचायत भवन, ग्राम सचिवालय आदि में वैकल्पिक भवन की व्यवस्था की जाएगी। शासन के आदेश हैं कि नए भवनों के निर्माण के दौरान बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
अंग्रेजी शासन में वर्ष 1935 में दौराला में उच्च प्राथमिक विद्यालय बना था। यह विद्यालय वर्तमान में आठवीं तक है। इसके अतिरिक्त, वर्ष 1940 में सराय बहलीम में प्राथमिक विद्यालय और 1940 में गांव फाजलपुर में बने उच्च प्राथमिक विद्यालय को भी तोड़कर नया भवन बनाया जाएगा।
विभिन्न विकास खंडों में चिह्नित विद्यालयों की संख्या इस प्रकार है: दौराला (11), मवाना (06), माछरा (06), हस्तिनापुर (12), जानी (18), सरधना (11), परीक्षितगढ़ (16), सरूरपुर (12), मेरठ (13), खरखौदा (06), रोहटा (17), और रजपुरा (03)।
चिह्नित किए गए 131 स्कूलों में से 38 को पूरी तरह तोड़ा जाएगा। बाकी विद्यालयों में से किसी में कक्ष और कुछ में मुख्य भवन आदि ही तोड़े जाएंगे। जिन स्कूलों को पूरा बनाया जाएगा, उनमें आधुनिक नए भवन बनेंगे, जिनमें वाशरूम से लेकर रसोई तक का निर्माण किया जाएगा। यह कदम छात्रों के लिए बेहतर और सुरक्षित शिक्षण वातावरण सुनिश्चित करने में मदद करेगा।
