अंगारक दोष: जानें कब और कैसे बनता है यह दोष, हनुमान पूजा से मिलेगा निवारण
सनातन धर्म में मंगलवार का दिन विशेष रूप से पवनपुत्र हनुमान जी को समर्पित है। इस दिन विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा करने से न केवल मंगल ग्रह मजबूत होता है, बल्कि शनिदेव भी प्रसन्न होते हैं। ज्योतिषियों के अनुसार, कुंडली में कुछ विशेष ग्रह योगों के कारण अंगारक दोष का निर्माण होता है, जो व्यक्ति के जीवन में उथल-पुथल मचा सकता है।
ज्योतिषियों का मानना है कि कुंडली में लगने वाले कई दोषों के पीछे मायावी ग्रह राहु और केतु का हाथ होता है। राहु और केतु को ज्योतिष शास्त्र में छाया ग्रह माना जाता है और ये सूर्य, चंद्र तथा बृहस्पति जैसे ग्रहों को अपना शत्रु मानते हैं। जब मंगल ग्रह की युति राहु या केतु में से किसी एक के साथ बनती है, तो कुंडली में अंगारक दोष उत्पन्न हो जाता है।
अंगारक दोष से पीड़ित जातक के स्वभाव में असमानता देखी जाती है। ऐसे व्यक्ति बहुत जल्दी क्रोधित हो जाते हैं और उनकी वाणी कठोर एवं कटु हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप, उन्हें जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ज्योतिषियों के अनुसार, यह दोष व्यक्ति को जीवन के हर मोड़ पर विषम परिस्थितियों में डाल सकता है और कई बार गुस्से में लिए गए निर्णय बने-बनाए कामों को भी बिगाड़ देते हैं। इस स्थिति के लिए मायावी ग्रह राहु को काफी हद तक जिम्मेदार माना जाता है।
अंगारक दोष के प्रभाव को कम करने और इससे मुक्ति पाने के लिए ज्योतिषीय उपाय बताए गए हैं। ऐसे जातकों को विशेष रूप से हनुमान जी की आराधना करनी चाहिए। प्रतिदिन हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करना अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है। इसके अतिरिक्त, लाल रंग की वस्तुओं का दान करना भी इस दोष के निवारण में सहायक माना जाता है। यदि कुंडली में अंगारक दोष की स्थिति गंभीर हो तो किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श लेकर विधिवत निवारण कराना चाहिए।
