संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी, परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पर सरकार का बड़ा प्लान | national news
केंद्र सरकार संसद का एक विशेष सत्र बुलाने की तैयारियों में जुटी है, जो इसी महीने के आखिर में आयोजित किया जा सकता है। इस संभावित सत्र का मुख्य एजेंडा परिसीमन और लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयकों को सदन में पेश करना है। सरकार का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है।
चूंकि पिछला मानसून सत्र समाप्त हो चुका है लेकिन उसका औपचारिक सत्रावसान नहीं किया गया है, इसलिए विशेष बैठक बुलाने का रास्ता संवैधानिक रूप से खुला हुआ है। वर्तमान में शासन स्तर पर सत्र की तारीखों और विस्तृत कार्यक्रमों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। ब्रिक्स संसदीय मंच का आगामी कार्यक्रम जो 26 और 27 अक्टूबर को संविधान सदन में प्रस्तावित है, उसे ध्यान में रखते हुए ही तिथियों का चयन किया जाएगा। बैठक आहूत करने से पहले अमूमन एक हफ्ते का नोटिस दिए जाने का प्रावधान है।
गौरतलब है कि कुछ महीने पहले बजट सत्र के दौरान इसी तरह का एक अहम विधेयक जरूरी समर्थन नहीं मिलने के कारण आगे नहीं बढ़ पाया था। अब सरकार अपनी पिछली कमियों से सबक लेते हुए अपनी रणनीति को मजबूत कर रही है। इस बार रणनीति के तहत द्रविड़ मुनेत्र कषगम यानी डीएमके के साथ-साथ कुछ अन्य क्षेत्रीय और छोटे दलों से भी बातचीत की जा रही है ताकि मतदान के वक्त किसी तरह की संख्यात्मक चुनौती का सामना न करना पड़े।
यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे माहौल में आकार ले रहा है जब विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। इस संवेदनशील राजनीतिक माहौल के बीच विशेष सत्र का आयोजन देश की विधायी दिशा और नीतिगत बदलावों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है, जिसका सीधा प्रभाव देश की आधी आबादी के प्रतिनिधित्व और चुनावी ढांचा पर पड़ेगा।
