उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव में सपा के सामने 111 का जादुई आंकड़ा जुटाने की बड़ी चुनौती | uttar pradesh rajya sabha elections
उत्तर प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज होने के साथ ही सियासी दलों ने जोड़तोड़ शुरू कर दी है। विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के आधार पर भाजपा और सपा के बीच एक बार फिर दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ा सवाल यह है कि समाजवादी पार्टी अपने तीसरे उम्मीदवार की नैया पार लगाने के लिए आवश्यक 111 वोटों का जादुई आंकड़ा कैसे पूरा करेगी।
राज्यसभा चुनाव के तय फॉर्मूले के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में एक सीट जीतने के लिए प्रथम वरीयता के 37 विधायकों के वोटों की आवश्यकता होती है। इस गणित के हिसाब से सपा अपने मौजूदा संख्याबल के दम पर दो सीटें आसानी से जीत सकती है, जिससे उसके पास लगभग 25 वोट सरप्लस बचेंगे। हालांकि, तीसरी सीट पर कब्जा जमाने के लिए पार्टी को कम से कम 12 और विधायकों के समर्थन की दरकार है।
अखिलेश यादव की रणनीति फिलहाल विपक्षी खेमे में सेंध लगाने और बागी विधायकों की घर वापसी पर टिकी है। पार्टी नेतृत्व का रुख साफ है कि तीसरे उम्मीदवार का ऐलान तभी किया जाएगा जब संख्या पूरी तरह अनुकूल होगी। दूसरी ओर, भाजपा भी अपने कोटे से अतिरिक्त सीट निकालने के लिए एनडीए के घटक दलों और अन्य तटस्थ विधायकों को एकजुट रखने की जुगत में लगी है। इस राजनीतिक शह-मात के खेल में क्रॉस वोटिंग और रणनीतिक गठबंधन ही तय करेंगे कि आखिरकार किसके माथे पर जीत का सेहरा बंधता है।
