मतदाता सूची संशोधन पर चुनाव आयोग की सफाई, आंतरिक मतभेदों को बताया सामान्य प्रक्रिया | national politics news
भारतीय चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच स्पष्ट किया है कि संस्था के भीतर विचारों का मतभेद और उस पर चर्चा करना किसी भी स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रणाली का अभिन्न हिस्सा है [national politics news]। आयोग ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 324 के दायरे में रहकर पूरी तरह से कानून सम्मत और पारदर्शी तरीके से अपने दायित्वों का निर्वहन करता है।
हाल ही में सामने आई कुछ आंतरिक टिप्पणियों और तकनीकी सुझावों पर प्रतिक्रिया देते हुए आयोग ने साफ किया कि नीतिगत फैसले लेने से पहले ड्राफ्ट पर सवाल उठाना या स्पष्टीकरण मांगना सामान्य प्रक्रिया है। पिछले एक साल के दौरान देश भर में कई बड़े चुनावों का सफल आयोजन किया गया है और वोटर लिस्ट रिवीजन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण निर्णय पूर्ण सहमति के साथ ही लिए गए हैं। इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का भरोसा और अधिक मजबूत होता है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म ईसीआईनेट की सुरक्षा को लेकर भी आयोग ने भरोसा दिलाया है कि यह पूरी तरह से सुरक्षित डेटा प्रोटोकॉल के तहत संचालित होता है। अनधिकृत बदलावों को रोकने के लिए पुख्ता साइबर सुरक्षा उपाय किए गए हैं। आयोग ने दोहराया कि उसके सभी अधिकारी और प्रशासनिक तंत्र देश में निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
