बैंक कर्मचारियों की तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान, सुलह बैठक बेनतीजा | national banking strike
देशभर के बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। सरकार के साथ हुई उच्चस्तरीय सुलह बैठक के बेनतीजा रहने के बाद यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने का फैसला किया है (national banking strike)। इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल के चलते आगामी दिनों में बैंकिंग सेक्टर पर गहरा असर पड़ने की पूरी संभावना है, जिससे आम नागरिकों के रोजमर्रा के वित्तीय कामकाज प्रभावित हो सकते हैं।
प्रमुख मांगें और सरकारी अपील
बैंक यूनियनों की मुख्य मांगों में सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग कार्य दिवस लागू करना, पेंशन में सुधार और अपडेशन, पेंशनभोगियों के लिए समान महंगाई भत्ता (DA) फॉर्मूला तथा पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली शामिल है। वित्त मंत्रालय और श्रम मंत्रालय के अधिकारियों ने यूनियंस से हड़ताल टालने की अपील की थी, लेकिन वार्ताओं में किसी भी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बन सकी।
लगातार पांच दिन ठप रह सकता है कामकाज
यह हड़ताल ऐसे समय में हो रही है जब महीने के आखिरी दिन और छमाही क्लोजिंग (Half-Yearly Closing) का दौर है। 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित इस हड़ताल से ठीक पहले शनिवार और रविवार का साप्ताहिक अवकाश होने के कारण बैंक लगातार पांच दिनों तक शाखा स्तर पर बंद रह सकते हैं। हालांकि, डिजिटल ट्रांजैक्शन, यूपीआई (UPI), एटीएम और इंटरनेट बैंकिंग सेवाएं सुचारू रूप से काम करती रहेंगी, लेकिन चेक क्लीयरेंस और कैश डिपॉजिट जैसे कार्यों के लिए ग्राहकों को इंतजार करना पड़ सकता है।
