अल-कायदा के संदिग्ध आतंकियों की गतिविधियों का दायरा बढ़ा, राज्यों में छानबीन तेज | up crime news
उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के हाथ लगे नए साक्ष्यों से यह स्पष्ट हो गया है कि अल-कायदा इन इंडियन सब-कॉटीनेंट (एक्यूआईएस) से जुड़े संदिग्ध आतंकी देश के कई अन्य राज्यों में भी अपनी जड़ें जमाने की कोशिश कर रहे थे। तमिलनाडु से गिरफ्तार किए गए मकसूद अली और आजमगढ़ से पकड़े गए नबील की गतिविधियों पर पिछले आठ महीनों से जांच एजेंसियों की पैनी नजर थी [up crime news]। शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई है कि ये सभी आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए आपस में जुड़े थे और लगातार संपर्क बनाए हुए थे।
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों की ओर से सोशल मीडिया पर संदिग्ध गतिविधियां बढ़ाए जाने के बाद ही वे सुरक्षा बलों के रडार पर आए थे। अब एटीएस नबील और मकसूद के उन साथियों की तलाश कर रही है जो व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए उनके संपर्क में थे। मूलरूप से सिद्धार्थनगर के रहने वाले मकसूद के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है, जिसमें कई पाकिस्तानी नंबर और महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। इसके अलावा, उसने ‘कैप्टन-एम-नेटवर्क’ नाम से एक सुरक्षित एप्लीकेशन भी तैयार की थी, जिसकी तकनीकी गहराई से जांच की जा रही है।
सुरक्षा एजेंसियों की इस कार्रवाई से यह बात सामने आती है कि कट्टरपंथी ताकतों द्वारा युवाओं को डिजिटल माध्यमों से जोड़ने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती खड़ी हो रही है। इस खुलासे के बाद से देश के कई राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कड़ी कर दी गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एटीएस अब गजवा-ए-हिंद, युनाइटेड उम्माह, टीम ब्लैक हैट और लश्कर-ए-मेंहदी जैसे कई संदिग्ध ऑनलाइन समूहों से जुड़े उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के युवकों का पूरा ब्योरा खंगाल रही है। केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से इन संदिग्धों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने की योजना पर काम चल रहा है ताकि किसी भी संभावित बड़े खतरे को समय रहते टाला जा सके।
